350वें शहीदी दिवस पर सीएम योगी का संबोधन— गुरुमति सम्मेलन में सेवा, त्याग और राष्ट्रधर्म पर जोर

350वें शहीदी दिवस के पावन अवसर पर आयोजित गुरुमति सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उपस्थित श्रद्धालुओं, संत समाज और सिख समुदाय के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत में गुरु परंपरा का स्थान सर्वोच्च है। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी जैसे महान संतों और योद्धाओं ने मानवता, धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए जो बलिदान दिया, वह पूरे विश्व के लिए प्रेरणा का स्रोत है। सीएम योगी ने जोर देकर कहा कि 350वां शहीदी दिवस केवल एक ऐतिहासिक स्मरण नहीं, बल्कि यह हमें यह याद दिलाता है कि सत्य की रक्षा, अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाना और राष्ट्र एवं धर्म के लिए अपना सर्वस्व त्याग देना— यही भारतीय परंपरा की मूल भावना है।
अपने उद्बोधन में मुख्यमंत्री ने गुरु तेग बहादुर जी के अद्वितीय साहस और मानवता के प्रति उनके समर्पण को याद करते हुए कहा कि उन्होंने कश्मीरी पंडितों और कमजोरों की रक्षा के लिए जो बलिदान दिया, वह इतिहास में अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि ऐसी विभूतियों के जीवन से ही हमें प्रेरणा लेनी चाहिए कि राष्ट्रहित हमेशा सर्वोपरि है। योगी आदित्यनाथ ने सम्मेलन के माध्यम से यह संदेश भी दिया कि यदि समाज को आगे बढ़ाना है तो सेवा, समर्पण और भाईचारे को जीवन में उतारना होगा। उन्होंने कहा कि गुरु परंपरा हमें सिखाती है कि साहस और करुणा, दोनों का संतुलन ही मानवता को सही दिशा देता है।
सीएम योगी ने कहा कि आज के समय में समाज को ऐसी प्रेरणाओं की सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं और बच्चों से अपील की कि वे गुरु परंपरा के मूल्यों को समझें और उसे अपनी दैनिक जीवनचर्या में शामिल करें। सम्मेलन में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उत्तर प्रदेश सरकार सिख इतिहास, गुरु परंपरा और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षाएँ भारतीय संस्कृति को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करती हैं, और 350वें शहीदी दिवस का आयोजन इस बात का प्रमाण है कि देश आज भी उन महान आत्माओं को सम्मान देता है जिन्होंने समाज और राष्ट्र के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
अंत में, सीएम योगी ने सभी को शहीदी दिवस की प्रेरणादायी भावना को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की और कहा कि गुरु परंपरा सदियों से भारत को एकजुट करने का कार्य करती आई है तथा आगे भी यह समाज को मार्गदर्शन देती रहेगी।



