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निशिकांत दुबे की टिप्पणियों के खिलाफ कांग्रेस नेता मिले ओम बिरला से, अधीर रंजन चौधरी ने कहा- उड़ाई जा रही हैं संसदीय नियमों की धज्जियां

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे की कुछ टिप्पणियों को सदन की कार्यवाही में शामिल किए जाने को लेकर विरोध जताया। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने यह आरोप भी लगाया कि संसदीय नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और संसद के भीतर भी तानाशाही की नजीर देखने को मिल रही है।

चौधरी, सदन में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, सांसद शशि थरूर, के. सुरेश और मणिकम टैगोर ने बिरला से मुलाकात की। बाद में चौधरी ने संवाददाताओं से कहा कि निशिकांत दुबे द्वारा लगाए गए ‘बेबुनियाद आरोपों’ को रिकॉर्ड में शामिल किए जाने को लेकर कांग्रेस और समान विचारधारा वाले दलों ने बिरला को पत्र भी लिखा है।

उनका कहना था, ‘‘दुबे ने (सोमवार को) आधारहीन तथ्यों के सहारे कांग्रेस और राहुल गांधी जी के खिलाफ आरोप लगाए…जब सदन में मंत्री का नाम पुकारा जाता है तो उस सदस्य (दुबे) का माइक ऑन किया जाता है, जो घटिया और आधारहीन बाते करते हैं।’’ उन्होंने बताया, ‘‘हमारी पार्टी और समान विचार वाले दलों की तरफ से लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा गया। हमने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात भी की। सदन के नियम के अनुसार, बिना नोटिस दिए गए इस तरह के आरोप नहीं लगाए जा सकते हैं।

’’ चौधरी ने कहा, ‘‘हमारी शिकायत के आधार पर रिकॉर्ड से घटिया बयान को हटा दिया गया था। चौंकाने की बात है कि रात के समय दुबे की उन बातों को रिकॉर्ड में फिर से शामिल कर लिया गया जिनको लेकर हमने आपत्ति जताई थी। हमारे संसदीय इतिहास में ऐसी कोई नजीर नहीं मिलती।’’ उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘दुर्भाग्य की बात है कि संसदीय नियमों, रीति और परंपराओं की धज्जियां उड़ाते हुए तानाशाही की नजीर संसद के अंदर देखी जा रही है। हम कहां जाएं? इससे देश के लोकतंत्र के लिए खतरा पैदा होता है।’’

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोमवार को लोकसभा में दावा किया था कि न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार की एक खबर में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के छापों के हवाले से खुलासा किया गया है कि एक पोर्टल को भारत के खिलाफ माहौल बनाने के लिए चीनियों से किस तरह पैसे मिले और वह धन किस तरह नक्सलियों और अन्य लोगों को पहुंचाया गया। दुबे ने आरोप लगाया था कि पोर्टल का प्रमुख ‘देशद्रोही टुकड़े-टुकड़े गिरोह का’ एक सदस्य है।

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