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भारत से रिश्ते बिगाड़ना अमेरिका के लिए खतरनाक: पूर्व अमेरिकी राजनयिकों ने ट्रंप को किया आगाह

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के परिदृश्य में भारत का महत्व लगातार बढ़ रहा है और यही कारण है कि अमेरिका के कई वरिष्ठ एवं पूर्व राजनयिकों ने डोनाल्ड ट्रंप को चेताया है कि भारत से टकराव या पंगा लेना उनके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। हाल ही में ट्रंप द्वारा दिए गए कुछ बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी राजनयिकों ने साफ कहा कि पाकिस्तान की तुलना में भारत कहीं ज्यादा अहम है और भविष्य की वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका निर्णायक होगी।

भारत-अमेरिका संबंधों का इतिहास पिछले तीन दशकों में काफी मजबूत हुआ है। चाहे वह व्यापारिक समझौते हों, रक्षा सहयोग, प्रौद्योगिकी में साझेदारी या इंडो-पैसिफिक रणनीति, भारत दोनों देशों के बीच संतुलन साधने और सहयोग बढ़ाने में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है। ऐसे में अगर ट्रंप भारत के खिलाफ किसी तरह की कठोर नीति अपनाते हैं तो इससे अमेरिका की वैश्विक स्थिति कमजोर हो सकती है। राजनयिकों का कहना है कि पाकिस्तान की तुलना में भारत न सिर्फ बड़ी अर्थव्यवस्था है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और स्थिर राजनीतिक व्यवस्था के कारण विश्वसनीय साझेदार भी है।

पूर्व राजनयिकों का मानना है कि अमेरिका के दीर्घकालिक हित भारत के साथ गहरे सहयोग पर आधारित हैं। वर्तमान समय में जब चीन की आक्रामक नीतियों से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में असंतुलन बढ़ रहा है, तब भारत ही एकमात्र ऐसा लोकतांत्रिक और शक्तिशाली देश है जो अमेरिका के लिए संतुलनकारी साझेदार बन सकता है। ट्रंप को चेतावनी देते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि पाकिस्तान से जुड़ाव अमेरिका के लिए सीमित उपयोगिता रखता है, लेकिन भारत से दूरी बनाना रणनीतिक और आर्थिक दोनों स्तर पर घातक हो सकता है।

भारत आज विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। तकनीकी क्षेत्र में उसकी क्षमता, अंतरिक्ष अनुसंधान, रक्षा उद्योग और बड़े उपभोक्ता बाजार ने उसे वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित कर दिया है। ऐसे में अमेरिका के लिए भारत को नाराज करना न केवल एशिया में उसके हितों को प्रभावित करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी उसके साझेदारों का भरोसा कमजोर करेगा।

कूटनीतिक विशेषज्ञों ने यह भी रेखांकित किया कि भारत और अमेरिका के बीच लोकतंत्र, स्वतंत्रता और मानवाधिकार जैसे साझा मूल्य हैं। ये मूल्य दोनों देशों के रिश्तों की नींव को और मजबूत करते हैं। यदि अमेरिका भारत से दूरी बनाता है तो यह उसके अपने लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा।

स्पष्ट है कि भारत का महत्व केवल भौगोलिक या आर्थिक दृष्टि से नहीं बल्कि सामरिक दृष्टिकोण से भी अत्यधिक बढ़ चुका है। पूर्व अमेरिकी राजनयिकों का यह बयान इस बात का प्रमाण है कि अब वैश्विक राजनीति में भारत की अनदेखी करना किसी भी महाशक्ति के लिए संभव नहीं रह गया है। ट्रंप जैसे नेता यदि इस हकीकत को नजरअंदाज करते हैं तो इसका खामियाजा अमेरिका को उठाना पड़ सकता है।

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