बांग्लादेश की राजधानी ढाका एक बार फिर से एक दिल दहला देने वाले हादसे की गवाह बनी, जहां एक बहुमंजिला इमारत में लगी आग ने अब तक 27 मासूम जिंदगियों को लील लिया है। हादसा इतना भीषण था कि कई शवों की पहचान तक मुश्किल हो गई। सबसे मार्मिक बयान उस महिला शिक्षिका का सामने आया जो घटनास्थल के पास ही मौजूद थीं। उन्होंने बताया, “मेरी आंखों के सामने बच्चे जिंदा जल गए। उनकी चीखें आज भी मेरे कानों में गूंज रही हैं। मैं कुछ कर भी नहीं सकी।” यह बयान हादसे की भयावहता और पीड़ा को शब्दों में समेटने का एक प्रयास मात्र है।
हादसा राजधानी ढाका के एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में हुआ जहां बच्चों की एक कोचिंग क्लास चल रही थी। आग शॉर्ट सर्किट से शुरू हुई और कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। न तो समय पर फायर अलार्म बजा और न ही पर्याप्त फायर सेफ्टी मौजूद थी। फंसे हुए छात्रों और आम लोगों को बचाने में फायर ब्रिगेड को घंटों लग गए। कुछ लोग खिड़कियों से कूदे तो कुछ छत पर फंस गए। कई वीडियो और तस्वीरें सामने आई हैं, जो इस त्रासदी की गंभीरता को बयान करती हैं।
सरकारी एजेंसियां जांच में जुटी हैं और शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी हुई थी। मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है क्योंकि कई घायलों की हालत नाजुक बनी हुई है। इस हादसे ने न सिर्फ पूरे बांग्लादेश को झकझोर दिया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या हमारे शहर आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं?
यह हादसा एक चेतावनी है कि केवल विकास और इमारतें खड़ी कर देने से शहर सुरक्षित नहीं बनते, ज़रूरत है सख्त नियमों की, जिम्मेदारी की और समय पर कार्रवाई की। पीड़ित परिवारों के लिए यह नुकसान कभी न भर पाने वाला है, और उनकी पीड़ा को शब्दों में पिरोना लगभग असंभव है।



