
ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जैर बोल्सोनारो को चुनाव परिणाम स्वीकार न करने और तख्तापलट की साजिश रचने के आरोप में 27 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई गई है। यह फैसला ब्राजील की सुप्रीम फेडरल कोर्ट ने उस लंबे मुकदमे के बाद सुनाया, जिसमें बोल्सोनारो पर 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में मिली हार के बाद लोकतांत्रिक व्यवस्था को अस्थिर करने और सेना के सहयोग से सत्ता पर अवैध रूप से कब्जा करने की योजना बनाने का आरोप था। बोल्सोनारो, जो अगस्त 2024 से नजरबंद थे, पर अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने गलत सूचना फैलाने, लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और हिंसक प्रदर्शनों को भड़काने की कोशिश की। अदालत के अनुसार, उनके कार्य लोकतांत्रिक ढांचे के लिए सीधा खतरा थे।
दरअसल 2022 के चुनाव में बोल्सोनारो को मौजूदा राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। परिणामों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने चुनाव आयोग पर धांधली के आरोप लगाए और अपने समर्थकों को सड़कों पर उतरने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से उकसाया। जनवरी 2023 में उनके समर्थकों द्वारा संसद, सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति भवन पर हमला इसी माहौल का परिणाम माना गया। इन घटनाओं ने ब्राजील के राजनीतिक इतिहास में गहरी दरार छोड़ दी और दुनिया भर में लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखी गईं।
जांच में सामने आया कि बोल्सोनारो और उनके करीबी सहयोगियों ने सेना के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर सत्ता पर कब्जा करने की रणनीति तैयार की थी। उनके फोन रिकॉर्ड, बातचीत और दस्तावेज़ों ने अदालत के सामने साजिश को साबित किया। अदालत ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में सरकार की आलोचना की अनुमति होती है, परंतु लोकतंत्र को गिराने की कोशिश को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इस फैसले ने ब्राजील की राजनीति में भूचाल ला दिया है। बोल्सोनारो के समर्थक इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि विपक्ष और मानवाधिकार समूह इस फैसले को लोकतंत्र की जीत और कानून के राज की मजबूती के रूप में देख रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस फैसले की बड़ी चर्चा है और कई देशों ने ब्राजील की न्यायपालिका के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि लोकतंत्र के खिलाफ किसी भी प्रकार की साजिश को कड़ी सज़ा मिलनी ही चाहिए।



