
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और बदलते वैश्विक हालात के बीच भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक संवाद लगातार जारी है। इसी क्रम में ईरान के विदेश मंत्री Hossein Amir-Abdollahian ने भारत के विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar को फोन किया। दोनों नेताओं के बीच यह चौथी बार टेलीफोन पर बातचीत हुई, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग और मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की गई। जानकारी के अनुसार, वार्ता के दौरान मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियों को सुचारू बनाए रखने जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया। भारत ने इस बातचीत के दौरान क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही यह भी कहा गया कि किसी भी प्रकार का संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। ईरानी मंत्री ने भी भारत के साथ अपने ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई। बातचीत में ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, विशेषकर तेल और गैस आपूर्ति के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। भारत के लिए ईरान ऊर्जा के महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक रहा है और दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग लंबे समय से जारी है। इसके अलावा चाबहार बंदरगाह परियोजना और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। भारत इस परियोजना को मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक व्यापारिक पहुंच बढ़ाने के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानता है। सूत्रों के अनुसार दोनों देशों ने यह भी सहमति जताई कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में संवाद और कूटनीति ही समस्याओं का समाधान निकालने का सबसे प्रभावी तरीका है। हाल के दिनों में मिडिल ईस्ट में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और संभावित टकराव की आशंकाओं के बीच यह बातचीत काफी अहम मानी जा रही है। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे ताकि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री मार्ग सुरक्षित रह सकें। इस चौथी बातचीत से यह स्पष्ट होता है कि भारत और ईरान के बीच रणनीतिक संवाद सक्रिय है और दोनों देश बदलते वैश्विक परिदृश्य में सहयोग बढ़ाने के लिए लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।



