
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गए हैं। आरोप हैं कि उन्होंने मिडिल ईस्ट से लेकर यूरोप तक एक ऐसा आर्थिक साम्राज्य खड़ा किया है, जिसकी जड़ें स्विस बैंक खातों और ब्रिटेन के लग्जरी मेंशनों तक फैली हुई हैं। हालांकि ईरानी शासन इन दावों को पश्चिमी प्रचार बताता रहा है, लेकिन समय-समय पर सामने आने वाली रिपोर्टें इन आरोपों को हवा देती रहती हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोजतबा खामेनेई पर आरोप है कि उन्होंने ईरान के भीतर राजनीतिक प्रभाव और धार्मिक संस्थानों से जुड़े नेटवर्क का इस्तेमाल कर भारी संपत्ति जुटाई। कहा जाता है कि यह पैसा विभिन्न शेल कंपनियों और बेनामी ट्रस्ट्स के जरिए विदेशों में ट्रांसफर किया गया। स्विट्ज़रलैंड में कथित बैंक अकाउंट्स और लंदन के पॉश इलाकों में स्थित करोड़ों की प्रॉपर्टी इसी का हिस्सा बताए जाते हैं।
ब्रिटेन में मौजूद कथित लग्जरी मेंशन को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। दावा है कि ये संपत्तियां सीधे उनके नाम पर न होकर रिश्तेदारों या करीबी सहयोगियों के नाम पर दर्ज हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और जांच एजेंसियों से बचा जा सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह तरीका केवल ईरान तक सीमित नहीं, बल्कि कई प्रतिबंधित देशों के प्रभावशाली लोग अपनाते हैं।
मोजतबा खामेनेई को ईरान की सत्ता संरचना में बेहद प्रभावशाली माना जाता है। वे औपचारिक रूप से किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, लेकिन सुरक्षा तंत्र, रिवोल्यूशनरी गार्ड और धार्मिक संस्थानों में उनकी गहरी पकड़ बताई जाती है। यही वजह है कि उन्हें भविष्य में सुप्रीम लीडर बनने की संभावित दावेदारी से भी जोड़ा जाता है। ऐसे में उनके नाम से जुड़ी संपत्ति और विदेशी कनेक्शन की खबरें और ज्यादा संवेदनशील हो जाती हैं।
ईरानी सरकार और खामेनेई परिवार इन आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है। उनका कहना है कि यह सब ईरान की छवि खराब करने और आंतरिक अस्थिरता फैलाने की साजिश है। बावजूद इसके, मानवाधिकार संगठनों और कुछ पश्चिमी देशों में यह मांग उठती रही है कि इन कथित संपत्तियों की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
कुल मिलाकर, स्विस बैंक अकाउंट और ब्रिटिश लग्जरी मेंशन से जुड़े ये दावे केवल एक व्यक्ति की संपत्ति का सवाल नहीं हैं, बल्कि ईरान की सत्ता, पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े बड़े मुद्दों को भी उजागर करते हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या ये आरोप सिर्फ चर्चाओं तक सीमित रहते हैं या किसी ठोस जांच और कार्रवाई का रूप लेते हैं।



