
आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया न सिर्फ मनोरंजन और जानकारी का माध्यम बन चुका है, बल्कि यह ठगी का सबसे आसान रास्ता भी बनता जा रहा है। हाल ही में एक नया रैकेट तेजी से फैल रहा है, जो खासकर Gen-Z यानी 16–25 साल के युवाओं को अपना निशाना बना रहा है। यह रैकेट सोशल मीडिया पर ऐसी पोस्ट और रील्स फैलाता है जिनमें दिखाया जाता है— “लग्जरी लाइफ, फॉरेन ट्रिप, ब्रांडेड चीजें और पैसा ही पैसा…”। इन वीडियो को देखकर युवा प्रभावित होते हैं और सोचते हैं कि वे भी कुछ ही दिनों में अमीर बन सकते हैं, लेकिन असलियत इससे बिल्कुल उलट है।
रैकेट चलाने वाले लोग पहले युवाओं को मैसेज या विज्ञापनों के जरिए आकर्षित करते हैं। वे दावा करते हैं कि उनके पास ऐसा “सीक्रेट बिजनेस मॉडल” है जिससे कोई भी युवक कुछ ही हफ्तों में लाखों रुपये कमा सकता है। शुरू में वे लाइफस्टाइल की वीडियो दिखाते हैं— महंगी कारें, विदेश यात्राएं, फाइव-स्टार होटल— ताकि युवा इस जाल में फंस जाएं। इसके बाद वे उनसे “मेंबरशिप”, “ट्रेनिंग”, या “इन्वेस्टमेंट” के नाम पर पैसे वसूलते हैं। अक्सर यह रकम 5000 से लेकर 50,000 रुपये तक होती है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कई युवक बिना जांच-पड़ताल के अपने पैसे दे भी देते हैं, क्योंकि वे जल्दी अमीर बनने के सपने में अंधे हो जाते हैं। लेकिन जैसे ही पैसा मिल जाता है, रैकेट चलाने वाले गायब हो जाते हैं या फिर युवाओं को किसी और के पैसे लाने के लिए कहते हैं, यानी पूरी प्रक्रिया एक फर्जी MLM या पोंजी स्कीम की तरह काम करती है।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, यह रैकेट इसलिए तेजी से फैल रहा है क्योंकि Gen-Z सोशल मीडिया पर सक्रिय है और लाइफस्टाइल को देखकर जल्दी प्रभावित हो जाती है। उन्हें लगता है कि यह सफलता की शॉर्टकट राह है, जबकि हकीकत में यह एक सोचा-समझा ठगी का जाल है। कई युवाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे इस स्कैम में फंसकर हजारों रुपये खो चुके हैं।



