
नेपाल में जारी चुनावी प्रक्रिया के बीच मतगणना लगातार आगे बढ़ रही है और शुरुआती रुझानों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। ताजा अपडेट के अनुसार Gen-Z आंदोलन के प्रतीक माने जाने वाले काठमांडू के मेयर बालेन शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पीछे छोड़ते हुए बढ़त बना ली है। इस अप्रत्याशित बढ़त ने नेपाल की पारंपरिक राजनीति को चुनौती देने का संकेत दिया है। युवा मतदाताओं के बीच बालेन शाह की लोकप्रियता पहले से ही चर्चा का विषय रही है, और चुनावी नतीजों के शुरुआती रुझान इस समर्थन को साफ तौर पर दिखा रहे हैं। बालेन शाह को सोशल मीडिया पर सक्रियता, भ्रष्टाचार विरोधी छवि और विकास पर केंद्रित राजनीति के कारण बड़ी संख्या में युवाओं का समर्थन मिला है। वहीं केपी शर्मा ओली नेपाल की स्थापित राजनीति के बड़े चेहरों में से एक माने जाते हैं और लंबे समय तक देश की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में शाह की बढ़त को नेपाल की नई पीढ़ी के राजनीतिक उभार के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह रुझान अंतिम परिणामों में भी कायम रहता है तो यह नेपाल की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का बड़ा संकेत होगा। चुनाव आयोग के अनुसार अभी कई क्षेत्रों की मतगणना जारी है और अंतिम नतीजों के लिए कुछ समय और लग सकता है। हालांकि शुरुआती रुझानों ने यह साफ कर दिया है कि इस बार के चुनाव में युवाओं की भूमिका निर्णायक साबित हो रही है। नेपाल में हाल के वर्षों में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक अस्थिरता जैसे मुद्दों ने भी मतदाताओं के रुझान को प्रभावित किया है। इसी कारण कई युवा मतदाता पारंपरिक दलों से हटकर नए चेहरों और वैकल्पिक राजनीति की ओर आकर्षित हुए हैं। बालेन शाह ने अपने चुनाव अभियान में पारदर्शिता, सुशासन और तकनीक आधारित प्रशासन का वादा किया था, जिसने खासकर शहरी युवाओं को काफी प्रभावित किया। दूसरी ओर केपी ओली का अनुभव और राजनीतिक नेटवर्क अभी भी मजबूत माना जाता है, इसलिए अंतिम परिणाम आने तक मुकाबला दिलचस्प बना रहेगा। फिलहाल पूरे नेपाल की निगाहें मतगणना पर टिकी हुई हैं और यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या Gen-Z की पसंद माने जाने वाले बालेन शाह वास्तव में इस चुनाव में बड़ा राजनीतिक उलटफेर कर पाते हैं या फिर अनुभवी नेता केपी ओली आखिरी दौर में वापसी करते हैं।



