यूपी दिवस समारोह का भव्य समापन, लोक कलाकारों ने बिखेरी माटी की खुशबू

उत्तर प्रदेश दिवस समारोह का रंगारंग समापन प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और जनजीवन की जीवंत झलक के साथ हुआ। समापन समारोह में लोक कलाकारों ने अपने नृत्य और गायन से माटी की खुशबू बिखेर दी, जिससे दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे। बुंदेलखंड, अवध, ब्रज, पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की लोक कलाओं ने मंच पर एक साथ आकर प्रदेश की विविधता में एकता का सुंदर संदेश दिया। ढोलक, मंजीरा, सारंगी और बांसुरी की मधुर धुनों पर थिरकते कलाकारों ने यह साबित कर दिया कि लोक संस्कृति आज भी जनमानस की धड़कन है।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक वंदना से हुई, जिसके बाद कथक, रासलीला, छऊ, बिरहा, आल्हा और कजरी जैसी विधाओं की मनोहारी प्रस्तुतियां दी गईं। लोक गायकों ने अपनी सधी हुई आवाज़ में प्रेम, वीरता और सामाजिक समरसता के गीत गाकर माहौल को भावुक बना दिया। वहीं युवा कलाकारों ने आधुनिक मंच सज्जा के साथ लोकनृत्य प्रस्तुत कर यह दिखाया कि परंपरा और नवाचार साथ-साथ चल सकते हैं। दर्शकों की तालियों और उत्साह ने कलाकारों का हौसला बढ़ाया और पूरा परिसर उत्सव के रंग में रंग गया।
समारोह में प्रदेश की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया गया। विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्रों में हुए प्रयासों का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यूपी अपनी जड़ों से जुड़कर आगे बढ़ रहा है। शिल्पकारों और हस्तकरघा कारीगरों की प्रदर्शनी ने स्थानीय उत्पादों की पहचान को नई मजबूती दी, जिससे ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश और सशक्त हुआ।
समापन अवसर पर कलाकारों और आयोजकों को सम्मानित किया गया। अतिथियों ने लोक कलाकारों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ये कलाकार हमारी सांस्कृतिक धरोहर के सच्चे संवाहक हैं। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक गीत और दीप प्रज्वलन के साथ यूपी दिवस समारोह का सफल और यादगार समापन हुआ। यह उत्सव न केवल मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि प्रदेश की आत्मा—उसकी माटी, उसकी बोली और उसकी संस्कृति—को पूरे गौरव के साथ प्रस्तुत करने में भी सफल रहा।



