
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर हिंदुओं पर हो रहे कथित हमलों और अत्याचारों के खिलाफ अमेरिका में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। शिकागो से लेकर लॉस एंजिलिस तक हजारों की संख्या में अमेरिकी हिंदू सड़कों पर उतरे और बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। इन प्रदर्शनों में भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों के साथ-साथ अन्य समुदायों के लोगों ने भी हिस्सा लिया, जिससे यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक चर्चा में आ गया है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बांग्लादेश में समय-समय पर मंदिरों पर हमले, घरों में तोड़फोड़, जबरन पलायन और हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। इसी कारण अमेरिका के कई बड़े शहरों में शांतिपूर्ण रैलियों, कैंडल मार्च और जनसभाओं का आयोजन किया गया। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए प्रदर्शनकारी “सेव माइनॉरिटीज इन बांग्लादेश” और “स्टॉप परसेक्यूशन” जैसे नारे लगा रहे थे।
शिकागो में आयोजित एक बड़ी रैली में वक्ताओं ने कहा कि यह सिर्फ किसी एक धर्म या देश का मुद्दा नहीं है, बल्कि मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर सवाल है। उन्होंने अमेरिकी सरकार और संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर नजर रखी जाए और वहां की सरकार पर दबाव बनाया जाए ताकि हिंसा पर रोक लग सके। लॉस एंजिलिस, न्यूयॉर्क, ह्यूस्टन और वॉशिंगटन डीसी में भी इसी तरह के प्रदर्शन हुए, जहां समुदाय के नेताओं ने एकजुट होकर अपनी बात रखी।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने यह भी कहा कि वे बांग्लादेश की आम जनता के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उन ताकतों का विरोध कर रहे हैं जो धार्मिक नफरत फैलाकर समाज को बांटने का काम कर रही हैं। कई प्रदर्शनकारियों ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए शांति और सद्भाव की अपील की।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में इस तरह के व्यापक विरोध-प्रदर्शन से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है। इससे न सिर्फ वैश्विक मीडिया का ध्यान इस ओर जाएगा, बल्कि मानवाधिकार संगठनों की सक्रियता भी बढ़ेगी। कुल मिलाकर, शिकागो से लॉस एंजिलिस तक हुए ये प्रदर्शन इस बात का संकेत हैं कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा अब केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि वैश्विक चिंता का विषय बन चुकी है।



