
गोवा में एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक माहौल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 77 फीट ऊंची भगवान राम की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया। इस कार्यक्रम को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हुए, जिनमें साधु-संत, स्थानीय नागरिक, कला प्रेमी और देशभर से आए श्रद्धालु शामिल थे। यह प्रतिमा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय कला, संस्कृति और शिल्पकला की अद्भुत मिसाल भी है। इस प्रतिमा के निर्माण में आधुनिक तकनीक और पारंपरिक शिल्प का अनोखा संगम देखने को मिलता है, जो इसे विशेष बनाता है।
प्रतिमा के अनावरण के बाद PM मोदी एक प्राचीन मठ में भी पहुंचे, जहां उन्होंने आध्यात्मिक साधना और शांति के लिए प्रार्थना की। मठ के साधुओं ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया और प्रधानमंत्री ने यहां मौजूद संतों से आशीर्वाद प्राप्त किया। पीएम मोदी ने इस अवसर पर कहा कि भगवान राम केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा, धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रतिमा का निर्माण गोवा की सांस्कृतिक विरासत को और समृद्ध करेगा और राम भक्तों के लिए यह स्थान भविष्य में प्रमुख तीर्थस्थल बन सकता है।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शक्ति ही उसे दुनिया में सबसे अलग बनाती है। उन्होंने कहा कि देश आज विकास के साथ-साथ अपनी जड़ों और परंपराओं को भी मजबूती से थामे हुए है। 77 फीट ऊंची इस प्रतिमा का अनावरण इसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जो आधुनिक भारत और सांस्कृतिक भारत के सुंदर मेल का प्रतीक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रतिमा से गोवा में धार्मिक पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और आने वाले समय में लाखों पर्यटक यहां आने की उम्मीद है। इसके अलावा, इस प्रतिमा से युवाओं में भगवान राम के आदर्शों और जीवन मूल्यों के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। राज्य सरकार ने भी इसे एक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में संरक्षित करने का निर्णय लिया है।
समापन में पीएम मोदी ने कहा कि भगवान राम की यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को सत्य, साहस, मर्यादा और सेवा की प्रेरणा देगी। यह कार्यक्रम न केवल एक अनावरण समारोह था, बल्कि भारत की आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक गौरव का भव्य उत्सव भी बना।



