
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर जी-7 देशों की अहम बैठक में शामिल होने पहुंचे हैं, जहां वैश्विक सुरक्षा और भू-राजनीतिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। खास तौर पर जी 7 की इस बैठक में ईरान से जुड़े मौजूदा तनाव और युद्ध जैसे हालात प्रमुख एजेंडे में शामिल बताए जा रहे हैं।
दुनिया के सात प्रमुख विकसित देशों का समूह जी-7 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक और सुरक्षा से जुड़े अहम फैसलों के लिए जाना जाता है। इस बार की बैठक ऐसे समय में हो रही है जब मध्य-पूर्व में हालात काफी संवेदनशील बने हुए हैं। ईरान और अन्य देशों के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक शांति और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
एस जयशंकर की इस बैठक में मौजूदगी भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को भी दर्शाती है। हालांकि भारत जी-7 का स्थायी सदस्य नहीं है, फिर भी उसे विशेष आमंत्रण के तहत शामिल किया जाता है। यह भारत की कूटनीतिक ताकत और अंतरराष्ट्रीय मामलों में उसकी अहम भूमिका को उजागर करता है।
बैठक के दौरान जयशंकर न केवल ईरान से जुड़े मुद्दों पर भारत का पक्ष रखेंगे, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति, और आतंकवाद जैसे विषयों पर भी चर्चा करेंगे। भारत हमेशा से शांति और संवाद के जरिए समाधान का पक्षधर रहा है, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि वह इस मंच पर संतुलित और सकारात्मक दृष्टिकोण पेश करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान से जुड़े हालात का सीधा असर तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर भी होगा। ऐसे में भारत की भागीदारी इस चर्चा में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कुल मिलाकर, जी-7 की यह बैठक वैश्विक स्तर पर कई बड़े फैसलों की दिशा तय कर सकती है। एस जयशंकर की उपस्थिति से भारत को अपनी बात रखने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्थिति मजबूत करने का एक और अवसर मिलेगा।



