
हाल ही में यमन में एक एलपीजी टैंकर पर इजराइली ड्रोन द्वारा हमला किए जाने की खबर सामने आई है, जिसमें टैंकर पर सवार 24 पाकिस्तानी नागरिकों की जान खतरे में पड़ गई। यह हमला उस समय हुआ जब टैंकर यमन के समुद्री क्षेत्र में था। हमले के बाद सभी 24 पाकिस्तानी नागरिकों को यमन के हूती विद्रोहियों ने बंधक बना लिया। यह घटना मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष की गंभीरता को दर्शाती है, जहां आम नागरिक भी अब सीधे तौर पर इस हिंसा के शिकार हो रहे हैं।
हूती विद्रोही, जो लंबे समय से यमन में सत्ता और अधिकार को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, अक्सर विदेशी जहाजों और व्यक्तियों को निशाना बनाते हैं। हालांकि, इस बार मामला और भी संवेदनशील था क्योंकि इसमें एक ओर इजराइली सैन्य हस्तक्षेप था और दूसरी ओर पाकिस्तानी नागरिक शामिल थे। पाकिस्तान ने तुरंत इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया और कूटनीतिक चैनलों के जरिए अपने नागरिकों की रिहाई की मांग की।
करीब 10 दिन तक चले तनाव के बाद आखिरकार हूती विद्रोहियों ने सभी पाकिस्तानी नागरिकों को रिहा कर दिया। सरकार और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के दबाव के चलते यह रिहाई संभव हो सकी। इस घटना ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि यमन में हालात बेहद नाजुक हैं और किसी भी समय किसी भी देश के नागरिक वहां संकट में फंस सकते हैं।
इस हमले और उसके बाद की घटनाओं ने वैश्विक राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। यह दिखाता है कि इजराइल और हूती विद्रोहियों के बीच टकराव केवल क्षेत्रीय नहीं रह गया है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव डाल रहा है। पाकिस्तान जैसे देशों को भी अब इस संघर्ष में अप्रत्यक्ष रूप से खींचा जा रहा है।



