
ISRO के नौ कर्मचारी संघों ने अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती निजी भागीदारी को लेकर चिंता जताई है। कर्मचारी संगठनों ने ISRO अध्यक्ष वी नारायणन को पत्र भेजकर निजीकरण की प्रक्रिया और संगठन की भविष्य की भूमिका को लेकर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।
कर्मचारी संघों का कहना है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी और मजबूत सार्वजनिक क्षेत्र वाला ISRO एक साथ काम कर सकते हैं। हालांकि, वे ऐसी नीति को लेकर चिंतित हैं जिससे ISRO की भूमिका केवल रिसर्च और डेवलपमेंट तक सीमित हो जाए।
संघों ने लॉन्च व्हीकल के निर्माण और संचालन में ISRO की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने PSLV, LVM3 और SSLV जैसे प्रमुख रॉकेटों के डिजाइन, विकास, परीक्षण, एकीकरण और लॉन्चिंग में संगठन की भविष्य की जिम्मेदारी स्पष्ट करने की मांग की है।
कर्मचारी संगठनों ने IN-SPACe के अध्यक्ष पवन गोयनका के उस कथित बयान का भी उल्लेख किया है, जिसमें कहा गया था कि भविष्य में ISRO लॉन्च व्हीकल का निर्माण नहीं करेगा। यूनियनों ने पूछा है कि क्या यह भारत सरकार, अंतरिक्ष आयोग या अंतरिक्ष विभाग का आधिकारिक निर्णय है।
यूनियनों ने ISRO की ओर से विकसित तकनीक को राष्ट्रीय संपत्ति बताते हुए इसके हस्तांतरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है। उनका कहना है कि रणनीतिक सुरक्षा और रोजगार के हितों को ध्यान में रखकर ही ऐसे फैसले लिए जाने चाहिए।
कर्मचारियों को आशंका है कि यदि लॉन्च व्हीकल और सैटेलाइट निर्माण जैसे कार्य निजी कंपनियों को अधिक मात्रा में दिए गए तो ISRO में इन-हाउस काम कम हो सकता है। इससे मौजूदा कर्मचारियों की भूमिका और भविष्य की नियमित भर्तियों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई गई है।
कर्मचारी संघों ने नई भर्तियों को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि संगठन के तकनीकी और निर्माण कार्यों का दायरा घटता है तो ग्रुप A, B और C पदों पर भर्ती के अवसर कम हो सकते हैं, जिससे अंतरिक्ष क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं पर असर पड़ेगा।
संघों ने स्पष्ट किया कि वे अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी या व्यावसायिक गतिविधियों के विरोध में नहीं हैं। उनकी मुख्य चिंता ISRO की तकनीकी क्षमता और संस्थागत भूमिका को बनाए रखने को लेकर है।
कर्मचारी संगठनों ने अपने पत्र को रचनात्मक और लोकतांत्रिक भावना से उठाया गया कदम बताया है। उन्होंने कहा कि ISRO और राष्ट्रीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के प्रति उनकी प्रतिबद्धता कायम है और इसी वजह से वे भविष्य की नीति को लेकर स्पष्टता चाहते हैं।
अब कर्मचारी संघ ISRO अध्यक्ष और संबंधित विभाग से लिखित जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका मुख्य सवाल है कि निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी के बीच ISRO की जिम्मेदारियां और तकनीकी भूमिका किस रूप में तय की जाएगी। संघों ने कहा है कि जवाब मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।



