
देश में अवैध प्रवासियों का मुद्दा लगातार संवेदनशील बना हुआ है। हाल ही में संघ प्रमुख ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों की पहचान कर उन्हें बाहर निकालना पूरी तरह से सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल कानूनी कर्तव्य नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता के दृष्टिकोण से भी अत्यंत आवश्यक है। भारत में अवैध रूप से रहने वाले प्रवासी कई बार स्थानीय समाज में तनाव और संघर्ष की स्थितियां पैदा कर देते हैं। संघ प्रमुख के अनुसार, इसके पीछे न केवल आर्थिक भार है, बल्कि सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अवैध प्रवासियों की संख्या बढ़ने से रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी संसाधनों पर दबाव बढ़ता है। इससे स्थानीय नागरिकों को नुकसान होता है और सामाजिक असंतुलन पैदा होता है। संघ प्रमुख ने कहा कि सरकार को इस दिशा में सक्रिय कदम उठाने चाहिए और संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि देश में केवल वैध रूप से रहने वाले लोग ही मौजूद रहें। उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रियाओं और तकनीकी निगरानी को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
संघ प्रमुख ने यह भी कहा कि केवल पहचान और निष्कासन ही समाधान नहीं है, बल्कि अवैध प्रवास रोकने के लिए सीमाओं पर निगरानी और कड़े नियम भी जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों में भी जागरूकता बढ़ानी होगी ताकि अवैध प्रवासियों की सूचना समय पर प्रशासन तक पहुंच सके। उनका मानना है कि इस दिशा में सामूहिक प्रयास से ही राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक समरसता सुनिश्चित की जा सकती है।
इसके अलावा उन्होंने सरकार से अपील की कि रोहिंग्या और बांग्लादेशी प्रवासियों के मुद्दे को राजनीतिक और धार्मिक दृष्टिकोण से न देखें, बल्कि इसे कानूनी और संवैधानिक दृष्टिकोण से हल करें। उन्होंने जोर दिया कि कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए और किसी भी प्रकार का भेदभाव इस प्रक्रिया में नहीं होना चाहिए। संघ प्रमुख के इस बयान ने सरकार और प्रशासन के लिए स्पष्ट संदेश दिया कि अवैध प्रवासियों के मुद्दे को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और इसे जल्द से जल्द नियंत्रित किया जाना जरूरी है।



