
देश के चर्चित रेडियो कार्यक्रम मन की बात पर गहन शोध करने वाले वरिष्ठ पत्रकार हरीश चंद्र बर्नवाल को डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह उपलब्धि मीडिया और जनसंचार जगत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इस शोध में कार्यक्रम के सामाजिक प्रभाव, नीति संवाद और जनभागीदारी के विभिन्न आयामों का विस्तार से अध्ययन किया गया। इस अवसर पर जेपी नड्डा ने बर्नवाल को सम्मानित करते हुए उनकी मेहनत, प्रतिबद्धता और विषय की गहराई से पड़ताल करने की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के शोध लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत करते हैं और यह समझने में मदद करते हैं कि किस प्रकार एक कार्यक्रम देश के करोड़ों लोगों को जोड़ने का माध्यम बन सकता है।
बताया गया कि हरीश चंद्र बर्नवाल ने अपने शोध में ‘मन की बात’ के प्रसारणों का विश्लेषण करते हुए यह समझने का प्रयास किया कि प्रधानमंत्री द्वारा उठाए गए मुद्दों का समाज पर क्या असर पड़ा, जनआंदोलनों को किस तरह गति मिली और सकारात्मक पहलों को किस रूप में राष्ट्रीय पहचान मिली। शोध में स्वच्छता, जल संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, स्टार्टअप, फिटनेस और स्थानीय उत्पादों के प्रोत्साहन जैसे विषयों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। कार्यक्रम की लोकप्रियता और जनता से सीधे जुड़ाव को अकादमिक दृष्टिकोण से परखने की इस पहल को अनूठा माना जा रहा है।
सम्मान समारोह में मौजूद अतिथियों ने कहा कि मीडिया पेशे से जुड़े लोगों का शोध के क्षेत्र में आगे आना नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है। बर्नवाल ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने सहयोगियों, मार्गदर्शकों और परिवार को देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य कार्यक्रम के माध्यम से उभरे सामाजिक बदलावों को दस्तावेज़ित करना था। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी जनसंचार से जुड़े विषयों पर गंभीर अध्ययन को बढ़ावा मिलेगा। यह सम्मान न केवल एक पत्रकार की व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि मीडिया और शोध के संगम का भी प्रतीक बनकर सामने आया है।



