
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने अमेरिका के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि भारत के किसी बंदरगाह से ईरान पर मिसाइल हमले किए जा रहे हैं। MEA ने स्पष्ट किया कि यह जानकारी पूरी तरह गलत और भ्रामक है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत की धरती या उसके किसी भी बंदरगाह का उपयोग किसी भी देश पर सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं किया जा रहा है। भारत की विदेश नीति हमेशा शांति, संतुलन और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान पर आधारित रही है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत किसी भी ऐसे कदम का समर्थन नहीं करता जो क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा दे। भारत का रुख साफ है कि पश्चिम एशिया क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहनी चाहिए। ऐसे में भारत के बंदरगाहों के इस्तेमाल से जुड़ी खबरें तथ्यहीन हैं और इन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए। मंत्रालय ने कहा कि भारत अपने सभी अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ पारदर्शिता और भरोसे के आधार पर संबंध बनाए रखता है।
दरअसल, हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा है, जिसके चलते कई तरह की खबरें और दावे सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में अमेरिका की ओर से यह संकेत दिया गया था कि कुछ सैन्य गतिविधियों में भारत के बंदरगाहों की भूमिका हो सकती है। हालांकि भारत सरकार ने तुरंत इस पर प्रतिक्रिया देते हुए साफ कर दिया कि ऐसी कोई गतिविधि नहीं हो रही है। भारत की नीति स्पष्ट रूप से गैर-हस्तक्षेप और शांति को बढ़ावा देने की रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की रणनीति हमेशा संतुलित कूटनीति की रही है। भारत एक तरफ अमेरिका के साथ मजबूत रणनीतिक संबंध रखता है, तो दूसरी तरफ ईरान जैसे देशों के साथ भी ऐतिहासिक और आर्थिक संबंध बनाए रखता है। इसलिए भारत किसी भी ऐसे विवाद में प्रत्यक्ष भूमिका से बचता है जो क्षेत्रीय संघर्ष को बढ़ा सकता है।
विदेश मंत्रालय के इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत अपनी संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को लेकर बेहद गंभीर है। साथ ही भारत यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि उसकी भूमि और संसाधनों का उपयोग किसी भी प्रकार के सैन्य टकराव के लिए न हो। सरकार का कहना है कि गलत सूचनाओं के जरिए भ्रम फैलाने की कोशिशों से सावधान रहने की जरूरत है और तथ्यों की पुष्टि के बाद ही ऐसी खबरों पर विश्वास किया जाना चाहिए।



