
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने चंद्र मिशन को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बहुप्रतीक्षित Artemis II मिशन अब लॉन्च के बेहद करीब पहुंच चुका है। हाल ही में इस मिशन से जुड़ा स्पेसक्राफ्ट लॉन्च पैड पर पहुंचा दिया गया है, जो इस बात का संकेत है कि मानव को फिर से चांद के करीब भेजने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा चुका है।
Artemis II मिशन खास इसलिए है क्योंकि यह करीब 50 साल बाद इंसानों को चांद के आसपास भेजने वाला पहला मिशन होगा। इससे पहले Apollo program के तहत इंसान ने चंद्रमा पर कदम रखा था। इस बार का मिशन सीधे चांद पर लैंडिंग नहीं करेगा, बल्कि अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की परिक्रमा कराकर सुरक्षित वापस पृथ्वी पर लाने का लक्ष्य है।
इस मिशन में Orion spacecraft का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसे Space Launch System (SLS) रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। यह अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट माना जा रहा है, जो भारी पेलोड को गहरे अंतरिक्ष में ले जाने में सक्षम है।
NASA के अनुसार, Artemis II मिशन की लॉन्चिंग 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में हो सकती है। हालांकि अंतिम तारीख तकनीकी परीक्षणों और मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगी। इस मिशन के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा, नेविगेशन और सिस्टम की कार्यक्षमता को परखा जाएगा, जो भविष्य में चांद पर मानव लैंडिंग के लिए बेहद अहम होगा।
Artemis कार्यक्रम का अंतिम लक्ष्य चांद पर स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करना और वहां से आगे Mars तक मिशनों की राह आसान बनाना है। NASA इस मिशन को भविष्य के अंतरिक्ष अन्वेषण की नींव मान रहा है।
कुल मिलाकर, Artemis II मिशन न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानव इतिहास में एक नई अंतरिक्ष दौड़ की शुरुआत का संकेत भी देता है। दुनिया की निगाहें अब इस ऐतिहासिक उड़ान पर टिकी हैं, जो आने वाले समय में अंतरिक्ष विज्ञान की दिशा बदल सकती है।



