
देश में रक्षा खरीद प्रक्रियाओं में हो रही देरी को लेकर Parliamentary Standing Committee on Defence ने कड़ा रुख अपनाया है। समिति ने स्पष्ट कहा है कि यदि रक्षा उपकरणों की खरीद में तय समयसीमा का पालन नहीं किया गया, तो आधुनिक तकनीक बेकार साबित हो सकती है। समिति के अनुसार, वर्तमान में कई महत्वपूर्ण रक्षा सौदे लंबे समय से लंबित हैं, जिसके कारण सेना को अत्याधुनिक संसाधन समय पर नहीं मिल पा रहे हैं। इससे न केवल देश की सुरक्षा तैयारियों पर असर पड़ता है, बल्कि पुराने उपकरणों पर निर्भरता भी बढ़ती है। समिति ने यह भी रेखांकित किया कि तकनीक तेजी से बदल रही है, ऐसे में देरी होने पर खरीदे जाने वाले उपकरण खरीद के समय तक ही पुराने पड़ सकते हैं। Ministry of Defence को निर्देश देते हुए समिति ने कहा कि खरीद प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाया जाए, ताकि सेना की जरूरतों को समय पर पूरा किया जा सके। इसके अलावा, समिति ने पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर भी जोर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे देश के लिए, जो लगातार बदलते सुरक्षा माहौल का सामना कर रहा है, रक्षा खरीद में तेजी और दक्षता बेहद जरूरी है। देरी के कारण लागत भी बढ़ती है, जिससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। समिति ने सुझाव दिया कि रक्षा सौदों के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की जाए और हर चरण की नियमित समीक्षा हो। साथ ही, स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में भी तेजी लाने की जरूरत बताई गई है, ताकि विदेशों पर निर्भरता कम हो सके। ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत घरेलू कंपनियों को प्रोत्साहन देकर इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। कुल मिलाकर, समिति का यह रुख दर्शाता है कि देश की सुरक्षा को लेकर अब किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो यह देरी भविष्य में गंभीर सुरक्षा चुनौतियों का कारण बन सकती है।



