
तिरुवल्लुवर दिवस के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से तिरुक्कुरल पढ़ने और उसके संदेशों को जीवन में उतारने की अपील की। उन्होंने तिरुक्कुरल को तमिल संस्कृति का सर्वोत्तम प्रतीक बताते हुए कहा कि यह ग्रंथ केवल तमिलनाडु ही नहीं, बल्कि पूरे भारत और विश्व मानवता के लिए नैतिक मार्गदर्शन का स्रोत है। पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि तिरुवल्लुवर द्वारा रचित तिरुक्कुरल सत्य, अहिंसा, करुणा, न्याय और कर्तव्य जैसे सार्वभौमिक मूल्यों को सरल शब्दों में प्रस्तुत करता है, जो आज के आधुनिक समाज के लिए भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने अपने रचनाकाल में थे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि तिरुक्कुरल की विशेषता यह है कि यह जीवन के हर पक्ष—व्यक्तिगत आचरण, पारिवारिक जीवन, सामाजिक दायित्व और शासन व्यवस्था—पर संतुलित दृष्टिकोण प्रदान करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तिरुवल्लुवर का दर्शन सीमाओं से परे है और विभिन्न भाषाओं व संस्कृतियों में अनूदित होकर मानवता को एक सूत्र में पिरोता है। पीएम मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि तिरुक्कुरल की शिक्षाएं युवाओं को नैतिक नेतृत्व, आत्मअनुशासन और सामाजिक सद्भाव की दिशा में प्रेरित करती हैं।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने तमिल भाषा और संस्कृति की समृद्ध विरासत की सराहना करते हुए कहा कि तमिल सभ्यता भारत की प्राचीनतम और सतत जीवित परंपराओं में से एक है। तिरुवल्लुवर दिवस इस बात का स्मरण कराता है कि ज्ञान, साहित्य और नैतिकता किसी एक काल या क्षेत्र तक सीमित नहीं होते। उन्होंने शिक्षण संस्थानों, परिवारों और समाज से आग्रह किया कि तिरुक्कुरल को पाठ्यक्रमों, चर्चाओं और दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां इन मूल्यों से परिचित हो सकें।
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि आज जब विश्व अनेक चुनौतियों—असहिष्णुता, हिंसा और नैतिक संकट—का सामना कर रहा है, तब तिरुक्कुरल जैसे ग्रंथ मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। यह हमें सिखाता है कि सशक्त समाज की नींव नैतिकता, करुणा और कर्तव्यबोध पर टिकी होती है। अंत में प्रधानमंत्री ने तिरुवल्लुवर दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तिरुक्कुरल का संदेश भारत की सांस्कृतिक एकता और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को और मजबूत करता है।



