PM मोदी बोले: मिशन सुदर्शन चक्र और वसुधैव कुटुम्बकम के साथ भारत का नया आत्मविश्वास दुनिया देख रही है

उडुपी में एक विशेष समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की वैश्विक भूमिका, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। अपने संबोधन में उन्होंने प्राचीन भारतीय दर्शन ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत हमेशा से पूरी दुनिया को एक परिवार मानकर चलने वाला देश रहा है। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नया भारत किसी के सामने झुकने वाला नहीं है, बल्कि दृढ़ता, साहस और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में मिशन सुदर्शन चक्र का विशेष उल्लेख किया, जो भारत की रक्षा तैयारी और उन्नत तकनीकी क्षमता को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पीएम मोदी ने कहा कि यह मिशन न केवल देश की सुरक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि यह भारत की तकनीकी कुशलता और रक्षा आत्मनिर्भरता का भी प्रमाण है। उन्होंने बताया कि आज भारत रक्षा क्षेत्र में सिर्फ आत्मनिर्भर ही नहीं बन रहा, बल्कि विश्व के कई देशों को उपकरण और तकनीक निर्यात भी कर रहा है।
उडुपी की जनता को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पिछले वर्षों में भारत ने दुनिया को यह दिखाया है कि वह अपनी परंपरा और आधुनिकता दोनों को साथ लेकर चल सकता है। वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश विश्व के लिए भारत का उपहार है, जो वैश्विक भाईचारे, शांति और सह-अस्तित्व पर आधारित है। लेकिन यह विचार भारत की मजबूती को कम नहीं करता, बल्कि यह बताता है कि भारत शांति चाहता है, पर अपनी सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि आज का भारत चुनौतियों से डरने वाला नहीं, बल्कि समाधान पेश करने वाला राष्ट्र बन चुका है। चाहे COVID के कठिन समय में वैक्सीन उत्पादन हो या प्राकृतिक आपदाओं में मदद पहुंचाना—भारत ने हर बार दुनिया को अपनी क्षमता और करुणा दोनों का परिचय दिया है। पीएम मोदी ने दावा किया कि मिशन सुदर्शन चक्र जैसे कार्यक्रम नए भारत के संकल्पों को और मजबूत करते हैं और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देने में अहम भूमिका निभाएंगे।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने जनता से आह्वान किया कि देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। आत्मसम्मान, तकनीकी प्रगति, मजबूत रक्षा और वैश्विक नेतृत्व—यही नया भारत की पहचान है, और यह भारत दुनिया के साथ खड़ा रहेगा, पर किसी के सामने झुकेगा नहीं।



