
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की आत्मकथा ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है, जब यह सामने आया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस आत्मकथा की प्रस्तावना (Foreword) लिखी है। यह किसी भी पश्चिमी नेता की आत्मकथा में भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा लिखा गया एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है।
प्रस्तावना में पीएम मोदी ने मेलोनी को “नारी शक्ति की प्रतीक” बताया और उनकी नेतृत्व क्षमता की खुलकर सराहना की। उन्होंने लिखा कि जॉर्जिया मेलोनी सिर्फ इटली की ही नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर महिलाओं के नेतृत्व की एक प्रेरणादायक मिसाल हैं। मोदी ने यह भी कहा कि मेलोनी का राजनीतिक संघर्ष, पारिवारिक पृष्ठभूमि और उनके फैसलों की दृढ़ता, आज की महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।
पीएम मोदी और मेलोनी के बीच हाल के वर्षों में कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सकारात्मक संवाद देखने को मिला है, चाहे वह G20 सम्मेलन हो या COP बैठकें। दोनों नेताओं ने कई बार एक-दूसरे की नीतियों और विचारों की सराहना की है। मेलोनी ने भी पीएम मोदी को “विश्व नेता” और “विश्वसनीय साझेदार” बताया है।
इस आत्मकथा में मेलोनी ने अपने बचपन, पारिवारिक संघर्ष, राजनीतिक जीवन और इटली की सत्ता तक पहुंचने के सफर को विस्तार से बताया है। मोदी की प्रस्तावना इस किताब को एक वैश्विक आयाम देती है और भारत-इटली के संबंधों में भी एक नई गहराई जोड़ती है।
यह कदम न केवल महिला सशक्तिकरण के लिए एक बड़ा संदेश है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे भारत आज विश्व राजनीति में एक मजबूत और सम्मानित आवाज बन चुका है। जॉर्जिया मेलोनी की आत्मकथा में पीएम मोदी की उपस्थिति, दोनों देशों के बीच मजबूत होते संबंधों की प्रतीक है।



