
मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि ठाकरे भाइयों का मराठी मानूस के लिए प्रेम पूरी तरह नकली है। शिंदे ने आरोप लगाया कि वर्षों तक BMC पर कब्जा रखने के बावजूद ठाकरे परिवार ने न तो मराठी मानूस को उसका हक दिलाया और न ही मुंबई के विकास को प्राथमिकता दी। उनके मुताबिक, मराठी पहचान को सिर्फ चुनावी मुद्दा बनाकर आम लोगों की भावनाओं से खेला गया, जबकि जमीनी स्तर पर समस्याएं जस की तस बनी रहीं।
एकनाथ शिंदे ने कहा कि उनकी सरकार और शिवसेना (शिंदे गुट) ने सत्ता में आने के बाद मुंबई और महाराष्ट्र के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने दावा किया कि इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार और नागरिक सुविधाओं के क्षेत्र में ठोस काम हुआ है, जो जनता के सामने साफ दिखाई देता है। शिंदे ने यह भी कहा कि जो लोग वर्षों तक सत्ता में रहे, वे आज विकास की बातें कर रहे हैं, जबकि जनता सब जानती है कि किसने काम किया और किसने सिर्फ वादे किए।
BMC चुनाव को मुंबई की राजनीति का सेमीफाइनल माना जाता है और ऐसे में मराठी मानूस का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। शिंदे ने ठाकरे भाइयों पर तंज कसते हुए कहा कि मराठी अस्मिता की आड़ में राजनीति करने वालों को अब जनता जवाब देगी। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले चुनाव में लोग विकास, स्थिर सरकार और काम करने वाली राजनीति को चुनेंगे, न कि भावनात्मक नारों को।
इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) और मनसे की ओर से भी पलटवार की उम्मीद जताई जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि BMC चुनाव न सिर्फ मुंबई की सत्ता तय करेगा, बल्कि महाराष्ट्र की भविष्य की राजनीति की दिशा भी निर्धारित करेगा। ऐसे में एकनाथ शिंदे और ठाकरे भाइयों के बीच यह जुबानी जंग आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है, जिसका सीधा असर मतदाताओं की सोच और चुनावी समीकरणों पर पड़ेगा।



