
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान की सैन्य रणनीति को लेकर दुनिया भर में चर्चा हो रही है। खासतौर पर ईरान की ‘मोजेक डिफेंस’ (Mosaic Defense) रणनीति को उसकी सबसे मजबूत सुरक्षा ढाल माना जाता है। इस रणनीति की खास बात यह है कि अगर देश के शीर्ष सैन्य या राजनीतिक नेतृत्व को नुकसान भी पहुंचता है, तब भी पूरे सिस्टम की ताकत खत्म नहीं होती। यही कारण है कि विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी एक बड़े नेता की मौत से भी तेहरान की सैन्य क्षमता पूरी तरह प्रभावित नहीं होगी।
‘मोजेक डिफेंस’ का मतलब है सुरक्षा और युद्ध क्षमता को कई छोटे-छोटे हिस्सों में बांट देना। ईरान ने अपनी सैन्य ताकत को लगभग सात अलग-अलग स्तरों में विभाजित किया है। इनमें नियमित सेना, रिवोल्यूशनरी गार्ड, मिसाइल यूनिट, साइबर यूनिट, ड्रोन नेटवर्क, क्षेत्रीय सहयोगी मिलिशिया और स्थानीय सुरक्षा नेटवर्क शामिल हैं। इन सभी इकाइयों को इस तरह तैयार किया गया है कि अगर किसी एक हिस्से को नुकसान होता है तो बाकी हिस्से स्वतंत्र रूप से काम करते रहें।
ईरान की इस रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और उससे जुड़े नेटवर्क हैं। यह संगठन न केवल देश की रक्षा करता है बल्कि क्षेत्रीय सहयोगियों और मिलिशिया समूहों के जरिए भी प्रभाव बनाए रखता है। इसके अलावा ईरान ने अपने मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रम को भी अलग-अलग कमांड सिस्टम में बांट रखा है, ताकि किसी हमले की स्थिति में पूरा सिस्टम एक साथ ठप न हो।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान की ‘मोजेक डिफेंस’ रणनीति का उद्देश्य पारंपरिक युद्ध की बजाय लंबे और बहुस्तरीय संघर्ष के लिए तैयार रहना है। यही वजह है कि ईरान ने स्थानीय मिलिशिया और सहयोगी समूहों का भी मजबूत नेटवर्क तैयार किया है, जो जरूरत पड़ने पर अलग-अलग मोर्चों पर सक्रिय हो सकते हैं। इस तरह ईरान किसी एक केंद्रीकृत कमांड पर निर्भर नहीं रहता।
कुल मिलाकर ‘मोजेक डिफेंस’ रणनीति ईरान को लचीला और टिकाऊ सैन्य ढांचा प्रदान करती है। इसी वजह से विश्लेषकों का मानना है कि चाहे नेतृत्व में बदलाव हो या बड़े हमले का खतरा, तेहरान की रणनीतिक क्षमता पूरी तरह खत्म करना बेहद मुश्किल है। यही मॉडल ईरान को लंबे समय तक संघर्ष में टिके रहने की क्षमता देता है।



