बाढ़-अतिवृष्टि से निपटने की तैयारी तेज, सीएम योगी के निर्देश: हर स्तर पर अलर्ट सिस्टम मजबूत हो

उत्तर प्रदेश में संभावित बाढ़ और अतिवृष्टि से निपटने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व तैयारियों की व्यापक समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि तटबंधों, बैराजों और प्रमुख नदियों की रियल टाइम निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा है, लेकिन बेहतर प्रबंधन, समय पर चेतावनी और समन्वित प्रयासों से जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सकता है। उन्होंने सिंचाई, जल संसाधन, राजस्व, आपदा प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन को आपसी तालमेल के साथ काम करने का निर्देश दिया। समीक्षा बैठक में यह भी कहा गया कि संवेदनशील जिलों की पहचान कर वहां विशेष सतर्कता बरती जाए और पहले से ही राहत सामग्री, नावें, एनडीआरएफ/एसडीआरएफ की टीमें तथा मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री ने तटबंधों की नियमित जांच, मरम्मत और कमजोर बिंदुओं की तत्काल मजबूती पर जोर दिया। साथ ही बैराजों के गेट संचालन की स्पष्ट एसओपी तैयार करने और डाउनस्ट्रीम इलाकों को समय रहते अलर्ट भेजने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि मौसम विभाग और केंद्रीय जल आयोग से प्राप्त पूर्वानुमानों को जिला स्तर तक तेजी से साझा किया जाए, ताकि प्रशासन अग्रिम तैयारी कर सके। गांव स्तर पर स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करने, सुरक्षित शरण स्थलों की पहचान, पशुओं के लिए चारे और दवाओं की व्यवस्था तथा पेयजल और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने के भी निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राहत शिविरों में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की जरूरतों का विशेष ख्याल रखा जाए और किसी भी स्थिति में अफवाहों को रोकने के लिए प्रभावी संचार रणनीति अपनाई जाए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और फील्ड में सक्रिय रहकर कार्य करना होगा। कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री योगी की यह समीक्षा बैठक बाढ़-अतिवृष्टि प्रबंधन को तकनीक-सक्षम, त्वरित और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे आने वाले मानसून में प्रदेश को बेहतर सुरक्षा मिल सके।



