
श्रीलंका इस समय भयंकर प्राकृतिक आपदा की चपेट में है, जहां विनाशकारी चक्रवात दितवाह ने व्यापक तबाही मचा दी है। तेज हवाओं, भीषण बारिश और समुद्री ज्वार के कारण पूरे देश में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक 132 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग घायल बताए जा रहे हैं। हजारों लोग घरों से बेघर हो चुके हैं और कई क्षेत्रों में स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। लगातार बढ़ते खतरे और बिगड़ते हालात को देखते हुए श्रीलंका के राष्ट्रपति ने देश में राष्ट्रीय आपातकाल (इमरजेंसी) घोषित करने की घोषणा की, ताकि राहत एवं बचाव कार्यों को तेजी से संचालित किया जा सके।
चक्रवात दितवाह की तीव्रता ने तटीय इलाकों को सबसे अधिक प्रभावित किया है, जहां बड़े पैमाने पर मकान ढह गए, बिजली आपूर्ति बाधित हो गई और सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो गईं। कई जिलों में संचार व्यवस्था टूट गई है, जिससे राहत दलों को दूरदराज इलाकों तक पहुंचने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने सेना, नौसेना और वायुसेना को राहत कार्यों में लगाया है, जबकि आपदा प्रबंधन बल दिन-रात प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटा हुआ है।
इमरजेंसी लागू करने के बाद देश में आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। अस्पतालों में अतिरिक्त मेडिकल टीम तैनात की गई हैं, जबकि घायलों के इलाज के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। सरकार ने प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री, भोजन, पानी और अस्थायी आवास उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए हैं। वहीं मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अभी भी कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और तेज हवाएं जारी रह सकती हैं, इसलिए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की गई है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी श्रीलंका की इस त्रासदी पर चिंता जताई है और मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाए हैं। कई देशों ने राहत सामग्री भेजने की घोषणा की है। विशेषज्ञों का कहना है कि चक्रवात दितवाह जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों का संकेत है, जिसकी वजह से ऐसे प्रकोप भविष्य में और भी तीव्र हो सकते हैं।



