
बांडी बीच पर हुए हमले के बाद पहली बार इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के ऑस्ट्रेलिया पहुंचने पर माहौल काफी संवेदनशील नजर आया। इस दौरे को जहां एक ओर दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यहूदी समुदाय के एक वर्ग ने राष्ट्रपति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया। हर्जोग की यात्रा ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व की परिस्थितियों और इजरायल की नीतियों को लेकर दुनिया के कई हिस्सों में बहस और असहमति का माहौल बना हुआ है।
सिडनी एयरपोर्ट से लेकर कार्यक्रम स्थलों तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पूरी तरह सतर्क दिखाई दिया। राष्ट्रपति हर्जोग ने अपने कार्यक्रमों में भाग लेते हुए आतंकवाद और हिंसा की घटनाओं की निंदा की और कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के समर्थन और दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों की भी सराहना की।
हालांकि, इस दौरे के दौरान कुछ यहूदी संगठनों और कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया। उनका कहना था कि वे इजरायल की मौजूदा नीतियों से असहमत हैं और शांति तथा मानवाधिकारों के मुद्दों पर अलग रुख चाहते हैं। प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की कोशिश की और कई जगह बैनर और पोस्टर के माध्यम से संदेश दिए। यह विरोध इस बात का संकेत माना जा रहा है कि समुदाय के भीतर भी विभिन्न मत मौजूद हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हर्जोग का यह दौरा कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया और इजरायल के बीच रक्षा, तकनीक, शिक्षा और व्यापार के क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में राष्ट्रपति की यात्रा भविष्य की साझेदारियों को नई दिशा दे सकती है। लेकिन साथ ही, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज करना भी आसान नहीं होगा।
बांडी बीच की घटना ने पहले ही सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द को लेकर चिंताएं बढ़ा दी थीं। ऐसे समय में किसी भी बड़े नेता का दौरा स्वाभाविक रूप से अतिरिक्त ध्यान आकर्षित करता है। हर्जोग ने अपने संबोधन में संवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर दिया और कहा कि असहमति भी लोकतंत्र का हिस्सा है।
कुल मिलाकर, यह यात्रा जहां एक तरफ आधिकारिक स्वागत और कूटनीतिक बातचीत का मंच बनी, वहीं दूसरी ओर इसने समुदाय के भीतर मौजूद विचारों की विविधता को भी उजागर कर दिया। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस दौरे का दोनों देशों के संबंधों और स्थानीय सामाजिक माहौल पर क्या असर पड़ता है।



