
रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने स्वदेशी लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली Project Kusha को भारत की रक्षा क्षमताओं के लिए एक बड़ा “गेम चेंजर” बताया है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना भविष्य में देश की वायु सुरक्षा को नई ऊंचाई दे सकती है और इसे भारत के स्वदेशी रक्षा विकास का महत्वपूर्ण चरण माना जाना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में प्रोजेक्ट कुशा की तुलना Govardhan Parvat से करते हुए कहा कि जिस प्रकार गोवर्धन पर्वत ने लोगों को सुरक्षा प्रदान की थी, उसी तरह यह प्रणाली भी देश की सुरक्षा कवच को मजबूत करने का काम करेगी। उनके इस बयान को परियोजना की रणनीतिक अहमियत के रूप में देखा जा रहा है।
प्रोजेक्ट कुशा को भारत की स्वदेशी लंबी दूरी की एयर डिफेंस प्रणाली के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य दुश्मन के लड़ाकू विमानों, ड्रोन, क्रूज मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों को लंबी दूरी से पहचानकर निष्क्रिय करने की क्षमता विकसित करना है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रोजेक्ट कुशा को अक्सर रूस की प्रसिद्ध S-400 Triumf प्रणाली के स्वदेशी विकल्प के रूप में देखा जाता है। हालांकि इसकी क्षमताओं और तकनीकी विशेषताओं का अंतिम मूल्यांकन इसके पूर्ण विकास और परीक्षणों के बाद ही संभव होगा।
यह परियोजना Defence Research and Development Organisation (DRDO) के नेतृत्व में विकसित की जा रही है और इसे भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति तथा “मेक इन इंडिया” पहल के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रोजेक्ट कुशा के सफल होने पर भारत की वायु रक्षा क्षमता और रणनीतिक स्वायत्तता दोनों को बड़ा बल मिलेगा। इससे भविष्य में विदेशी रक्षा प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।



