
हाल ही में अपने आखिरी सार्वजनिक संबोधन में मोहम्मद यूनुस ने ऐसे बयान दिए, जिनसे एक बार फिर भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर बहस तेज हो गई है। अपने भाषण के दौरान उन्होंने भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र, जिसे आमतौर पर ‘सेवन सिस्टर्स’ के नाम से जाना जाता है, का उल्लेख करते हुए कुछ ऐसी टिप्पणियां कीं जिन्हें भारत विरोधी और भड़काऊ माना जा रहा है। ‘सेवन सिस्टर्स’ में Arunachal Pradesh, Assam, Manipur, Meghalaya, Mizoram, Nagaland और Tripura शामिल हैं, जो भौगोलिक और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यूनुस के बयान में इन राज्यों की स्थिति और भारत की नीतियों को लेकर अप्रत्यक्ष टिप्पणी की गई, जिसे कई राजनीतिक विश्लेषकों ने अनावश्यक और तनाव बढ़ाने वाला बताया। भारत और Bangladesh के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं, ऐसे में इस तरह की टिप्पणी को कूटनीतिक मर्यादाओं के विपरीत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जिम्मेदार नेताओं को संतुलित भाषा का प्रयोग करना चाहिए, खासकर तब जब दोनों देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी और सुरक्षा सहयोग बढ़ रहा हो। यूनुस के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई लोगों ने इसे उनके कार्यकाल के अंत में दिया गया विवादित संदेश बताया, जबकि कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान घरेलू राजनीति को ध्यान में रखकर दिया गया हो सकता है। कुल मिलाकर, उनके आखिरी भाषण ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि दक्षिण एशिया की राजनीति में शब्दों का चयन कितना अहम होता है और असंतुलित बयान किस तरह क्षेत्रीय रिश्तों पर असर डाल सकते हैं।



