
भारत और अरब देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर एक बार फिर जोर देते हुए अव्वाद ने कहा है कि भारत और अरब दुनिया के बीच करीब पांच हजार वर्षों पुराना व्यापारिक रिश्ता रहा है। उन्होंने बताया कि यह संबंध केवल आधुनिक कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्राचीन काल से ही दोनों सभ्यताओं के बीच व्यापार, संस्कृति और ज्ञान का आदान-प्रदान होता रहा है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत और अरब देशों के रिश्ते रणनीतिक साझेदारी की नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं।
अव्वाद ने कहा कि सिंधु घाटी सभ्यता के दौर से लेकर समुद्री व्यापार के माध्यम से भारत और अरब देशों के बीच मसालों, कपड़ों, धातुओं और अन्य वस्तुओं का लेन-देन होता रहा है। यही व्यापारिक संबंध समय के साथ आपसी विश्वास और सांस्कृतिक जुड़ाव में बदल गए, जिसने दोनों क्षेत्रों को एक-दूसरे के करीब लाने का काम किया। उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि भारत और अरब समाजों ने एक-दूसरे से बहुत कुछ सीखा है।
आधुनिक दौर में भी भारत-अरब संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। ऊर्जा सुरक्षा, निवेश, बुनियादी ढांचा, रक्षा सहयोग और तकनीक जैसे क्षेत्रों में दोनों पक्षों के बीच साझेदारी लगातार बढ़ रही है। अव्वाद के अनुसार, आज अरब देश भारत के प्रमुख व्यापारिक और निवेश साझेदारों में शामिल हैं, जबकि भारत भी अरब क्षेत्र में विकास परियोजनाओं और मानव संसाधन के क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारतीय प्रवासी समुदाय अरब देशों में आर्थिक विकास की रीढ़ बन चुका है। लाखों भारतीय कामगार, पेशेवर और कारोबारी अरब देशों की अर्थव्यवस्थाओं में योगदान दे रहे हैं, जिससे दोनों पक्षों के बीच लोगों से लोगों का रिश्ता और मजबूत हुआ है। यह मानवीय जुड़ाव भारत-अरब संबंधों को केवल सरकारी स्तर तक सीमित नहीं रहने देता, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी गहराई देता है।
अव्वाद ने भविष्य को लेकर आशावाद जताते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में भारत और अरब देशों के बीच सहयोग और भी व्यापक होगा। हरित ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप और शिक्षा जैसे नए क्षेत्रों में साझेदारी की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि पांच हजार वर्षों पुराने इस रिश्ते की नींव पर खड़ा आधुनिक सहयोग दोनों पक्षों के लिए समृद्धि और स्थिरता लेकर आएगा।



