
G20 समिट 2025 एक ऐसे महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा, जहां वैश्विक नेतृत्व, सहयोग और कूटनीति का अनोखा संदेश दुनिया के सामने आया। इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति का वह बयान, जिसमें उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विशेष रूप से “थैंक्यू” कहा। राष्ट्रपति ने खुले शब्दों में स्वीकार किया कि यह सम्मेलन कई चुनौतियों से भरा था और ऐसे माहौल में भारत ने जिस तरह नेतृत्व दिखाया, वह सराहनीय है। उन्होंने कहा— “यह मुश्किल था, लेकिन आपने इसे आसान और सफल बनाया।”
दरअसल, इस बार G20 के एजेंडे में वैश्विक आर्थिक मंदी, जलवायु परिवर्तन, विकासशील देशों की चुनौतियाँ और ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मजबूत बनाने जैसे गंभीर मुद्दे शामिल थे। इन विषयों पर एकमत होना आसान नहीं था, लेकिन PM मोदी ने जिस कुशलता से विभिन्न देशों के बीच संवाद स्थापित किया, उसने सम्मेलन को सफल दिशा दी। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने विशेष तौर पर यह बताया कि भारत ने विकासशील देशों के मुद्दों को प्राथमिकता देने में एक सेतु का काम किया, जिसके कारण महत्त्वपूर्ण सहमति बनी।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने न केवल अपने हितों की बात रखी, बल्कि अफ्रीकी देशों और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भी आवाज़ उठाई। इससे ग्लोबल साउथ को एक मजबूत प्लेटफॉर्म मिला। उनके अनुसार, यदि भारत की यह सक्रिय भूमिका न होती, तो कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ और समझौते संभव नहीं हो पाते। यही वजह है कि उन्होंने PM मोदी के प्रयासों को विशेष धन्यवाद दिया।
इसके अलावा, समिट के दौरान भारत की संगठन क्षमता, मेजबानी और तकनीकी प्रबंधन की भी जमकर सराहना हुई। प्रतिनिधियों ने माना कि भारत ने समिट को न केवल सुरक्षित और सुचारू तरीके से संचालित किया, बल्कि इसे एक यादगार अनुभव भी बनाया। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने चुनौतियों के बीच आशा और समाधान का मार्ग दिखाया, जो दुनिया के लिए प्रेरणादायक है।
कुल मिलाकर, यह संदेश साफ है कि भारत की कूटनीति और नेतृत्व क्षमता आज वैश्विक स्तर पर मजबूत हो चुकी है। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति का “थैंक्यू” सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का सम्मान है। इस घटना ने भारत की विश्व राजनीति में बढ़ती प्रतिष्ठा को फिर से स्थापित कर दिया है।



