
दिल्ली में छात्र आत्महत्या की दर्दनाक खबर के कुछ ही दिनों बाद मध्यप्रदेश के रीवा से भी एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक स्कूली छात्र ने कथित रूप से प्रताड़ना से तंग आकर अपनी जान दे दी। घटना ने पूरे इलाके और शिक्षा जगत में गहरी चिंता पैदा कर दी है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि छात्र द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट में सीधे-सीधे अपने शिक्षक पर परेशान करने का आरोप लगाया गया है। छात्र ने लिखा कि टीचर लगातार उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था, डांटता था और बेवजह ताने मारता था, जिसकी वजह से वह लगातार तनाव में जी रहा था। परिवार का कहना है कि बच्चा पिछले कुछ समय से बेहद उदास था और कई बार स्कूल जाने से भी कतराता था।
परिजनों के अनुसार, उन्होंने बच्चे के व्यवहार में काफी बदलाव देखा था, लेकिन उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है। घरवालों ने बताया कि छात्र ने कई बार स्कूल में टीचर की सख्ती का जिक्र किया था, लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि यह तनाव उसके जीवन पर इतना भारी पड़ जाएगा। इस घटना के सामने आने के बाद स्कूल प्रशासन पर भी सवाल उठने लगे हैं कि आखिर बच्चों की मानसिक स्थिति पर ध्यान क्यों नहीं दिया जाता और शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं होती। वहीँ, स्थानीय पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित शिक्षक सहित स्कूल से जुड़े सभी लोगों से पूछताछ की जा रही है।
हाल के वर्षों में बच्चों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव, बुलेइंग और शिक्षकों की कठोरता के कारण आत्महत्या के मामलों में वृद्धि ने पूरे देश में चिंता की लकीरें खींच दी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किशोर उम्र में मानसिक दबाव बेहद खतरनाक रूप ले सकता है और ऐसे में किसी भी तरह की प्रताड़ना बच्चा सहन नहीं कर पाता। यह घटना इस बात का फिर से सबूत है कि शिक्षा संस्थानों में बच्चों की मानसिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।
अंत में, रीवा की इस घटना ने फिर एक बार शिक्षा प्रणाली, शिक्षक-छात्र संबंध और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत को उजागर कर दिया है। परिवार न्याय की मांग कर रहा है और उम्मीद है कि जांच में सच सामने आएगा ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। यह घटना पूरे समाज को यह सोचने के लिए मजबूर करती है कि बच्चों की आवाज सुनना और उन्हें भावनात्मक रूप से सुरक्षित वातावरण देना कितना जरूरी है।



