
Sundar Pichai ने भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में उभरता हुआ “पावरहाउस” बताते हुए कहा है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की भूमिका निभा सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की विशाल युवा आबादी, तेजी से बढ़ता डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत आईटी इकोसिस्टम देश को एआई इनोवेशन का केंद्र बना रहे हैं। पिचाई ने भारत और अमेरिका के बीच बन रहे डिजिटल कॉरिडोर को भविष्य की साझेदारी का मजबूत आधार बताया, जो दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग को नई दिशा देगा।
पिचाई के अनुसार, भारत में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर—जैसे आधार, यूपीआई और डिजिटलीकरण की अन्य पहल—ने तकनीक को आम लोगों तक पहुंचाने का रास्ता आसान किया है। यही कारण है कि एआई आधारित समाधान शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और शासन जैसे क्षेत्रों में तेजी से लागू हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की स्टार्टअप संस्कृति और इंजीनियरिंग प्रतिभा वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी है।
भारत-अमेरिका डिजिटल कॉरिडोर के तहत दोनों देश सेमीकंडक्टर, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी और एआई रिसर्च जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। इससे न केवल तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। पिचाई ने यह भी संकेत दिया कि वैश्विक कंपनियां भारत में रिसर्च और डेवलपमेंट निवेश बढ़ाने के लिए उत्साहित हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई के क्षेत्र में भारत की भूमिका केवल टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक बदलाव का माध्यम भी बनेगी। डिजिटल कॉरिडोर के माध्यम से डेटा शेयरिंग, संयुक्त अनुसंधान और स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों को बढ़ावा मिलेगा। इससे भारत वैश्विक सप्लाई चेन और डिजिटल इकोनॉमी में अहम भागीदार बन सकेगा।
कुल मिलाकर, सुंदर पिचाई का यह बयान भारत की बढ़ती तकनीकी ताकत और वैश्विक स्तर पर उसकी साख को दर्शाता है। यदि भारत इसी गति से डिजिटल सुधार और नवाचार को आगे बढ़ाता रहा, तो वह निश्चित ही एआई के क्षेत्र में विश्व नेतृत्व की ओर तेजी से अग्रसर होगा।



