TET अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक एकजुट, 22 फरवरी से आंदोलन का ऐलान

टीईटी अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। विभिन्न शिक्षक संगठनों ने इसे लेकर साझा रणनीति बनाते हुए 22 फरवरी से व्यापक आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने के लिए कई जिलों में बैठकें हुईं, जिनमें बड़ी संख्या में शिक्षकों ने भाग लिया और एक स्वर में कहा कि वर्तमान व्यवस्था से लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के सामने नौकरी की असुरक्षा खड़ी हो रही है। उनका कहना है कि अनुभव और सेवा अवधि को नजरअंदाज कर केवल पात्रता परीक्षा को आधार बनाना न्यायसंगत नहीं है। संगठनों का तर्क है कि सरकार को ऐसा समाधान निकालना चाहिए, जिससे गुणवत्ता भी बनी रहे और वर्षों से पढ़ा रहे शिक्षकों के अधिकार भी सुरक्षित रहें।
शिक्षक नेताओं का कहना है कि वे पहले भी ज्ञापन और वार्ता के माध्यम से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचा चुके हैं, लेकिन अब तक ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। ऐसे में मजबूर होकर उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। 22 फरवरी से प्रस्तावित इस चरणबद्ध आंदोलन में धरना, प्रदर्शन, रैली और जरूरत पड़ने पर कार्य बहिष्कार जैसे कदम भी शामिल किए जा सकते हैं। हालांकि, कई संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि छात्रों की पढ़ाई को पूरी तरह प्रभावित न करने की कोशिश की जाएगी, लेकिन यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
शिक्षकों का मुख्य आग्रह है कि टीईटी से संबंधित नियमों में संशोधन कर सेवा में लगे शिक्षकों को राहत दी जाए। वे चाहते हैं कि अनुभव, प्रशिक्षण और पूर्व नियुक्ति प्रक्रियाओं को भी मान्यता दी जाए। आंदोलन की घोषणा के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासन की ओर से भी हालात पर नजर रखी जा रही है। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही प्रतिनिधियों से बातचीत कर कोई मध्य रास्ता निकालने की कोशिश कर सकती है, ताकि विवाद लंबा न खिंचे।
फिलहाल शिक्षकों में एकजुटता का माहौल है और वे इसे अपने सम्मान तथा भविष्य से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं। 22 फरवरी को होने वाले प्रदर्शन पर सबकी निगाहें टिकी हैं, क्योंकि इससे आगे की रणनीति तय होगी और यह स्पष्ट होगा कि वार्ता से समाधान निकलता है या आंदोलन और व्यापक रूप लेता है।



