
अमेरिका और चीन के बीच चल रही ट्रेड वार्ता एक बार फिर सुर्खियों में है और इस बार केंद्र में है लोकप्रिय शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म टिकटॉक। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देते हुए संकेत दिए हैं कि अमेरिका में टिकटॉक बंद हो सकता है। उन्होंने साफ कहा कि इस मामले में वे कुछ नहीं कर सकते क्योंकि यह अब राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यापारिक हितों से जुड़ा विषय है।
टिकटॉक, जिसे दुनिया भर के करोड़ों यूजर्स इस्तेमाल करते हैं, लंबे समय से अमेरिका और चीन के बीच विवाद का कारण रहा है। अमेरिकी सरकार का मानना है कि टिकटॉक की पेरेंट कंपनी ByteDance चीन से संचालित होती है और इससे अमेरिकी यूजर्स का डाटा लीक होने या जासूसी की आशंका बनी रहती है। हालांकि कंपनी बार-बार यह कह चुकी है कि उसका प्लेटफॉर्म पूरी तरह सुरक्षित है और यूजर्स का डाटा अमेरिका में ही स्टोर किया जाता है।
डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान से एक बार फिर टिकटॉक यूजर्स में चिंता बढ़ गई है। अमेरिका में लाखों लोग टिकटॉक से न केवल मनोरंजन करते हैं बल्कि इसे रोजगार और कमाई का जरिया भी बना चुके हैं। कंटेंट क्रिएटर्स के लिए टिकटॉक एक ऐसा मंच है जिसने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई। अगर यह बैन होता है तो करोड़ों यूजर्स और हजारों क्रिएटर्स पर सीधा असर पड़ेगा।
US-चीन ट्रेड वार्ता के बीच टिकटॉक का मुद्दा इसलिए भी गर्माया है क्योंकि दोनों देशों के बीच पहले से ही आर्थिक और तकनीकी क्षेत्र में तनातनी चल रही है। ट्रंप प्रशासन के दौरान ही Huawei और अन्य चीनी कंपनियों पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई थीं। अब टिकटॉक पर संकट ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका चीन की टेक कंपनियों पर भरोसा करने को तैयार नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर टिकटॉक अमेरिका से बैन हो जाता है, तो इससे न केवल ByteDance को आर्थिक नुकसान होगा बल्कि अमेरिकी सोशल मीडिया इंडस्ट्री में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। फेसबुक, इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब शॉर्ट्स जैसे प्लेटफॉर्म्स को इसका सीधा फायदा मिल सकता है। वहीं दूसरी तरफ, चीन भी इस फैसले पर कड़ा रुख अपनाते हुए अपने जवाबी कदम उठा सकता है, जिससे ट्रेड वार्ता और भी मुश्किल हो जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि टिकटॉक का मुद्दा केवल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अब भू-राजनीतिक और आर्थिक संघर्ष का हिस्सा बन चुका है। अमेरिका में टिकटॉक बैन होगा या नहीं, यह आने वाले दिनों में तय होगा, लेकिन इतना तय है कि इस विवाद ने एक बार फिर से दुनिया को US-चीन संबंधों की जटिलता का एहसास करा दिया है।



