यूपी का ‘साथी पोर्टल’: QR कोड से मिलेगी बीज-खाद की असली पहचान, किसानों को सुरक्षा कवच

उत्तर प्रदेश में किसानों को नकली बीज, खाद और कीटनाशकों की समस्या से राहत देने के लिए सरकार ‘साथी पोर्टल’ को एक मजबूत सुरक्षा कवच के रूप में तैयार कर रही है। इस डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य कृषि इनपुट की गुणवत्ता को लेकर पारदर्शिता बढ़ाना और किसानों को खरीद से पहले सही जानकारी उपलब्ध कराना है। नई प्रणाली के तहत उत्पादों पर QR कोड लगाया जाएगा, जिसे मोबाइल से स्कैन करते ही निर्माता कंपनी, बैच नंबर, निर्माण तिथि, लाइसेंस, गुणवत्ता प्रमाणन और सप्लाई चेन से जुड़ी अहम जानकारियां तुरंत सामने आ जाएंगी। इससे न सिर्फ मिलावटी या नकली सामान की पहचान आसान होगी, बल्कि जिम्मेदार कंपनियों की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
‘साथी पोर्टल’ के माध्यम से किसान यह भी देख सकेंगे कि संबंधित उत्पाद किस डीलर के जरिए बाजार में पहुंचा है। यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी मिलती है तो शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी ऑनलाइन उपलब्ध होगी, जिससे कार्रवाई तेज और प्रभावी हो सके। सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित निगरानी से बिचौलियों की मनमानी कम होगी और कृषि क्षेत्र में भरोसे का माहौल बनेगा। यह कदम किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि सही गुणवत्ता का इनपुट मिलने पर फसल का उत्पादन और उत्पादकता दोनों बेहतर होंगे।
पोर्टल को विभागीय डेटाबेस से जोड़ा जाएगा, ताकि लाइसेंसधारी विक्रेताओं और पंजीकृत कंपनियों का पूरा रिकॉर्ड एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहे। अधिकारी नियमित रूप से डाटा अपडेट करेंगे और संदिग्ध मामलों में तुरंत जांच शुरू की जा सकेगी। ग्रामीण इलाकों में जागरूकता अभियान चलाकर किसानों को QR कोड स्कैन करने और डिजिटल शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया सिखाई जाएगी। इससे डिजिटल साक्षरता को भी बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल कृषि बाजार में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता नियंत्रण के नए मानक तय कर सकती है। यदि व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो नकली उत्पादों के कारोबार पर बड़ी चोट पड़ेगी और किसानों का भरोसा मजबूत होगा। कुल मिलाकर ‘साथी पोर्टल’ खेती को सुरक्षित, आधुनिक और अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।



