
नेपाल में हाल ही में बनी अंतरिम सरकार को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभकामनाएं दी हैं और कहा है कि भारत शांति, स्थिरता और लोकतंत्र के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहेगा। पीएम मोदी ने नेपाल की जनता और वहां के नेतृत्व को बधाई देते हुए यह भी स्पष्ट किया कि भारत अपने पड़ोसी देश के साथ दोस्ती, सहयोग और विकास की राह पर आगे बढ़ना चाहता है। उन्होंने यह संदेश दिया कि भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध बहुत गहरे हैं और दोनों देशों की प्रगति एक-दूसरे से जुड़ी हुई है।
नेपाल में अंतरिम सरकार का गठन उस समय हुआ है जब देश में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बना हुआ था। ऐसे में भारत की तरफ से आई यह बधाई न केवल पड़ोसी देश के लिए प्रोत्साहन है, बल्कि यह संकेत भी है कि भारत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। भारत की यह नीति हमेशा से रही है कि पड़ोसी देशों के साथ आपसी विश्वास और सहयोग के आधार पर आगे बढ़ा जाए। यही कारण है कि पीएम मोदी का यह बयान नेपाल की राजनीति के लिए काफी मायने रखता है।
भारत और नेपाल का रिश्ता सिर्फ कूटनीतिक या राजनीतिक नहीं है, बल्कि यह भावनात्मक और सांस्कृतिक बंधनों से भी गहराई से जुड़ा है। दोनों देशों के बीच खुली सीमाएं, साझा परंपराएं और धार्मिक आस्थाएं इस संबंध को और मजबूत बनाती हैं। नेपाल की राजनीतिक स्थिरता भारत की रणनीतिक और सुरक्षा दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अस्थिरता का असर सीधे भारत की सीमाओं पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत का रुख हमेशा यही रहा है कि नेपाल में लोकतंत्र मजबूत हो और वहां की जनता को विकास और स्थिरता का लाभ मिले।
पीएम मोदी के इस बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि भारत केवल अपने हितों की रक्षा करने वाला देश नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय शांति और विकास का भी समर्थक है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती ही दोनों देशों के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है। भारत हमेशा नेपाल की संप्रभुता का सम्मान करता आया है और उसी के साथ विकास की राह पर साझेदारी निभाता रहा है।
नेपाल की अंतरिम सरकार को भारत की तरफ से मिली यह शुभकामनाएं आने वाले समय में दोनों देशों के बीच और अधिक सहयोग का मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं। चाहे वह आर्थिक साझेदारी हो, ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग हो या फिर सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान – हर स्तर पर भारत और नेपाल साथ मिलकर आगे बढ़ सकते हैं। पीएम मोदी का यह कदम यह भी दर्शाता है कि भारत अपने पड़ोसियों के साथ “पड़ोसी प्रथम” की नीति पर दृढ़ है और दक्षिण एशिया में शांति एवं स्थिरता की धुरी बनना चाहता है।



