
पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में एक बार फिर हिंसा ने भयावह रूप ले लिया है। हाल के दिनों में बलूच विद्रोही संगठनों ने महिला फिदायीन हमलावरों और घातक IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) हमलों के जरिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। सुरक्षा सूत्रों और स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, अलग-अलग हमलों में करीब 200 पाकिस्तानी जवानों के मारे जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि पाकिस्तान सरकार इन आंकड़ों को स्वीकार नहीं करती, लेकिन लगातार हो रहे हमले स्थिति की गंभीरता को साफ दिखाते हैं।
बलूच बागियों की रणनीति अब पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक और योजनाबद्ध हो गई है। पहले जहां घात लगाकर हमला और रॉकेट फायर आम थे, वहीं अब महिला आत्मघाती हमलावरों को आगे किया जा रहा है। यह न केवल सुरक्षा बलों के लिए एक नई चुनौती है, बल्कि सामाजिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी बड़ा झटका माना जा रहा है। महिला फिदायीन हमलावर अक्सर सुरक्षा जांच से आसानी से निकल जाती हैं, जिससे हमलों की सफलता की संभावना बढ़ जाती है।
IED हमले बलूच विद्रोहियों का सबसे घातक हथियार बन चुके हैं। सड़क किनारे, सैन्य काफिलों के मार्ग में और चेक पोस्ट के आसपास लगाए गए विस्फोटक अचानक तबाही मचा देते हैं। कई मामलों में एक ही काफिले पर कई विस्फोट किए गए, जिससे बचाव और जवाबी कार्रवाई का मौका तक नहीं मिल पाया। इन्हीं हमलों में बड़ी संख्या में सैनिकों के हताहत होने की खबरें सामने आई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बलूच विद्रोह के पीछे लंबे समय से चला आ रहा राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक असंतोष है। प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर होने के बावजूद बलूचिस्तान को विकास से वंचित रखा गया, जिसका गुस्सा अब हिंसक रूप में सामने आ रहा है। इसके साथ ही क्षेत्र में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) जैसी परियोजनाओं ने भी तनाव को और बढ़ाया है, क्योंकि स्थानीय आबादी खुद को हाशिए पर महसूस करती है।
कुल मिलाकर, महिला फिदायीन हमले और IED अटैक यह संकेत देते हैं कि बलूच बागी अब लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं। यदि पाकिस्तान ने केवल सैन्य कार्रवाई पर भरोसा किया और मूल समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो यह संघर्ष और भी खतरनाक रूप ले सकता है।



