
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की आशंकाओं के बीच वैश्विक तेल बाजार की नजर अब संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह बंदरगाह पर टिक गई है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का लगभग एक-तिहाई हिस्सा गुजरता है। ऐसे में अगर यह मार्ग बाधित होता है तो पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसी वजह से फुजैराह बंदरगाह की रणनीतिक अहमियत तेजी से बढ़ गई है।
फुजैराह बंदरगाह यूएई के पूर्वी तट पर स्थित है और यह सीधे अरब सागर से जुड़ा हुआ है, जिससे तेल टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरने की जरूरत नहीं पड़ती। यही कारण है कि वैश्विक तेल कंपनियां और कई देश इस बंदरगाह को वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग के रूप में देखने लगे हैं। यूएई ने पिछले कुछ वर्षों में यहां बड़े पैमाने पर तेल भंडारण सुविधाएं और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया है, जिससे यह दुनिया के प्रमुख ऑयल स्टोरेज और ट्रांजिट हब में शामिल हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में किसी कारणवश आवाजाही रुकती है तो फुजैराह बंदरगाह तेल सप्लाई को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यूएई ने अबू धाबी से फुजैराह तक एक पाइपलाइन भी विकसित की है, जिसके जरिए कच्चे तेल को सीधे इस बंदरगाह तक पहुंचाया जा सकता है। इससे तेल निर्यात के लिए वैकल्पिक रास्ता तैयार हो गया है और क्षेत्रीय संकट के समय भी सप्लाई जारी रखी जा सकती है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार में फुजैराह की बढ़ती भूमिका का असर कीमतों और सप्लाई रणनीतियों पर भी पड़ रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां यहां अपने भंडारण टैंक बना रही हैं और इसे ट्रेडिंग हब के रूप में विकसित करने की कोशिश कर रही हैं। यही वजह है कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव के बीच फुजैराह बंदरगाह अचानक वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। आने वाले समय में अगर मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव जारी रहता है तो फुजैराह की अहमियत और भी बढ़ सकती है और यह दुनिया के तेल बाजार की स्थिरता के लिए एक प्रमुख आधार बन सकता है।



