
नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने मंगलवार को कहा कि भारत दो साल के भीतर संयुक्त उद्यम के माध्यम से अपना स्वदेशी नागरिक विमान तैयार करने की स्थिति में पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि देश में विमानन से जुड़ा पूरा इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है।
मंत्री के अनुसार भारतीय एयरलाइंस ने 1,600 से अधिक विमानों के ऑर्डर दिए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 100 अरब डॉलर है। इसके अलावा अगले 10 वर्षों में 100 से अधिक नए हवाई अड्डे विकसित होने की उम्मीद है। फिलहाल देश में करीब 165 हवाई अड्डे हैं और घरेलू एयरलाइंस के बेड़े में लगभग 850 विमान हैं।
भारत में विमान निर्माण को बढ़ावा देने के लिए घरेलू सप्लाई चेन और उच्चस्तरीय मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नायडू ने विमानन क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता और कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर भी जोर दिया।
फिलहाल भारत में विमानन क्षेत्र की बड़ी जरूरत विदेशी निर्माताओं से पूरी होती है। हालांकि, Boeing और Airbus जैसी कंपनियां भारत से बड़ी मात्रा में कलपुर्जे और सेवाएं लेती हैं। मंत्री के मुताबिक भारत से इन कंपनियों की सोर्सिंग मौजूदा करीब 4 अरब डॉलर से बढ़कर दशक के अंत तक 10 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।
सरकार देश में विमान इंजन निर्माण की संभावनाओं पर भी विचार कर रही है। हालांकि, मंत्री ने संकेत दिया कि स्वदेशी जेट इंजन विकसित करना लंबी अवधि की प्रक्रिया होगी। इसके साथ ही भारत को Sustainable Aviation Fuel यानी SAF के संभावित निर्यातक के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
भारत में स्वदेशी नागरिक विमान तैयार करने की दिशा में पहले से भी कई परियोजनाओं पर काम हुआ है। CSIR-NAL ने Hansa-NG और Saras जैसे स्वदेशी विमान कार्यक्रमों के साथ Regional Transport Aircraft (RTA) कार्यक्रम पर भी काम किया है। ऐसे में आने वाले वर्षों में घरेलू विमान निर्माण का इकोसिस्टम और मजबूत होने की उम्मीद है।



