
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का अगले हफ्ते भारत दौरा रणनीतिक और रक्षा संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर चर्चा होने की संभावना है, जिनमें सबसे ज्यादा ध्यान राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर टिका हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय वायुसेना की जरूरतों और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त राफेल विमानों की खरीद या उनसे जुड़े अपग्रेड पैकेज पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। भारत और फ्रांस के बीच रक्षा साझेदारी पहले से ही मजबूत रही है, लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों ने इस सहयोग को और ज्यादा प्रासंगिक बना दिया है।
मैक्रों की इस यात्रा का उद्देश्य सिर्फ रक्षा सौदों तक सीमित नहीं रहेगा। दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, तकनीकी साझेदारी, अंतरिक्ष कार्यक्रम और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी बातचीत आगे बढ़ सकती है। हालांकि, राफेल डील को लेकर राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में सबसे अधिक चर्चा है, क्योंकि यह भारत की वायु शक्ति को नई मजबूती देने से जुड़ा मुद्दा है। माना जा रहा है कि अगर नई खरीद या संयुक्त उत्पादन पर सहमति बनती है, तो इससे ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी बढ़ावा मिलेगा और रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रांस उन गिने-चुने देशों में है, जिन पर भारत लंबे समय से भरोसा करता आया है। चाहे तकनीक हस्तांतरण का सवाल हो या संवेदनशील रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, पेरिस ने नई दिल्ली की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश की है। ऐसे में मैक्रों की यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों से यह साफ हो जाएगा कि राफेल सौदे को लेकर किस दिशा में प्रगति होती है, लेकिन इतना तय है कि यह दौरा भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने वाला साबित हो सकता है।



