Form 6 विवाद: नए वोटरों के फॉर्म में क्या बदला? 5 किरदारों से समझिए पूरी कहानी

Form 6 क्या है?
Form 6 नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाला वैधानिक फॉर्म है। 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले पात्र नागरिक या भारतीय नागरिकता हासिल करने वाले व्यक्ति इसके जरिए मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
क्या नया जोड़ा गया?
जुलाई 2026 से ऑनलाइन Form 6 भरने वाले आवेदकों के सामने SIR से जुड़ा अतिरिक्त घोषणा पत्र आया। इसमें आवेदक से पूछा गया कि उसका नाम या उसके माता-पिता/दादा-दादी का नाम पिछली Special Intensive Revision (SIR) वाली मतदाता सूची में था या नहीं। संबंधित विकल्प चुनने के बाद पुराने निर्वाचन क्षेत्र, बूथ और क्रम संख्या जैसी जानकारी भी मांगी जा सकती थी।
विवाद क्यों हुआ?
चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने इस अतिरिक्त घोषणा को लेकर आपत्ति जताई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों ने सवाल उठाया कि Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म में बदलाव के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। उन्होंने बदलाव को अनधिकृत बताते हुए इसे हटाने की मांग की थी।
CEC ज्ञानेश कुमार का पक्ष क्या है?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता वाले आयोग ने इस मामले में कहा कि Form 6 में बदलाव नहीं किया गया है। ECI के अनुसार SIR से संबंधित आवश्यकता को मूल फॉर्म में संशोधन के बजाय अलग अतिरिक्त घोषणा पत्र (Annexure D) के तौर पर जोड़ा गया है। आयोग ने 24 जून 2025 के SIR निर्देशों का भी हवाला दिया है।
आखिर विवाद किस बात पर है?
पूरे मामले में मुख्य सवाल यह है कि नए मतदाता से SIR में उसके या उसके परिवार के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी मांगने के लिए किस कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। एक तरफ दो चुनाव आयुक्तों ने प्रक्रिया पर आपत्ति जताई, जबकि ECI का कहना है कि मूल Form 6 अपरिवर्तित है और अतिरिक्त घोषणा अलग से ली जा रही है। इसी अंतर को लेकर मौजूदा विवाद सामने आया है।



