
कोलकाता का ऐतिहासिक रेड रोड केवल एक सड़क नहीं, बल्कि शहर के गौरवशाली अतीत और आधुनिक पहचान का जीवंत प्रतीक है। आज जहां इस सड़क पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस जैसे भव्य आयोजन होते हैं, वहीं कभी दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इसे अस्थायी फाइटर एयरस्ट्रिप के रूप में इस्तेमाल किया गया था। इतिहास और वर्तमान का यह अनोखा संगम रेड रोड को देश के सबसे खास सार्वजनिक स्थलों में शामिल करता है।
ब्रिटिश शासनकाल में निर्मित रेड रोड को मूल रूप से सैन्य और प्रशासनिक उपयोग के लिए विकसित किया गया था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब जापानी हमलों का खतरा बढ़ा, तब इस सड़क को आपातकालीन रनवे के रूप में तैयार किया गया। आवश्यकता पड़ने पर लड़ाकू विमानों की लैंडिंग और टेकऑफ के लिए इसका उपयोग किया जा सकता था। यही वजह है कि रेड रोड का नाम कोलकाता के सैन्य इतिहास में विशेष महत्व रखता है।
आजादी के बाद रेड रोड ने एक नई पहचान हासिल की। यह सड़क गणतंत्र दिवस परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, राज्य स्तरीय समारोहों और बड़े सार्वजनिक आयोजनों का प्रमुख केंद्र बन गई। विशाल खुले क्षेत्र और ऐतिहासिक महत्व के कारण यहां समय-समय पर राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें हजारों लोग भाग लेते हैं।
हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन ने रेड रोड को एक नई पहचान दी है। जहां कभी युद्धकालीन तैयारियों की गूंज सुनाई देती थी, वहीं आज यहां स्वास्थ्य, शांति और सामूहिक कल्याण का संदेश दिया जाता है। दूसरे विश्व युद्ध की एयरस्ट्रिप से योग दिवस के मंच तक का यह सफर रेड रोड की ऐतिहासिक विरासत और बदलते भारत की कहानी को बखूबी बयां करता है।



