
बिहार चुनावों के बाद भारतीय जनता पार्टी अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों पर अपना फोकस तेज करती दिखाई दे रही है। पार्टी की रणनीति से जुड़े सूत्रों के अनुसार, हाल ही में आयोजित एक बैठक में गृहमंत्री अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को नए लक्ष्य और ज़मीनी स्तर पर अभियान को मजबूत करने संबंधी दिशा-निर्देश दिए। बताया जाता है कि शाह ने कार्यकर्ताओं से कहा कि आने वाले महीनों में बूथ स्तर पर संपर्क बढ़ाना और स्थानीय मुद्दों पर लोगों से सीधी बातचीत पार्टी की जीत की कुंजी होगी।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में राजनीतिक परिस्थितियाँ बाकी राज्यों से अलग हैं, इसलिए अभियान की रूपरेखा भी उसी अनुसार तैयार की जाएगी। कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया कि वे प्रत्येक क्षेत्र के सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं को समझते हुए संवाद बढ़ाएँ और नए मतदाताओं तक पहुँच बनाने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाएँ। इसके अलावा, डिजिटल कैंपेन को भी अधिक आक्रामक और स्थान-विशेष के अनुरूप बनाने पर ज़ोर दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, शाह ने संगठनात्मक टीमों को यह भी कहा कि वे पार्टी की ताकत और कमज़ोरियों का वास्तविक आकलन करें ताकि हर विधानसभा क्षेत्र के लिए अलग-अलग रणनीति बनाई जा सके। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आगामी चुनावों में युवा वोटरों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, इसलिए कॉलेज संपर्क अभियान, सोशल मीडिया इंटरैक्शन और ग्राउंड एक्टिविटी को तेज करने की जिम्मेदारी विशेष टीमों को दी जाएगी।
पार्टी में चर्चा है कि बंगाल और तमिलनाडु दोनों ही राज्यों में भाजपा अपनी उपस्थिति को मजबूत करने के लिए क्षेत्रीय नेताओं और स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली चेहरों को भी अधिक जिम्मेदारियाँ दे सकती है। बताया जाता है कि पार्टी का उद्देश्य न केवल वोट प्रतिशत बढ़ाना है, बल्कि उन क्षेत्रों में भी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराना है जहाँ अब तक पार्टी की पकड़ कमजोर मानी जाती रही है।
कुल मिलाकर, बिहार चुनावों के बाद भाजपा अब नए चुनावी मोर्चों के लिए तैयार होती दिख रही है। शाह के दिशा-निर्देशों के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा देखने को मिल रही है, और आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु दोनों राज्यों में भाजपा का चुनावी अभियान और गति पकड़ने की उम्मीद है।



