
केंद्र की मोदी सरकार में मंत्रिपरिषद विस्तार और फेरबदल की अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। मौजूदा समय में केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 68 मंत्री हैं, जबकि इसकी अधिकतम स्वीकृत संख्या 81 है। यानी मंत्रिपरिषद में 13 पद खाली हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक करीब 40 प्रतिशत कैबिनेट रैंक के मंत्री एक से अधिक मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इनमें अमित शाह, जेपी नड्डा, शिवराज सिंह चौहान, निर्मला सीतारमण, मनोहर लाल, प्रह्लाद जोशी, अश्विनी वैष्णव और जी किशन रेड्डी जैसे नाम शामिल हैं।
मंत्रालयों के अतिरिक्त प्रभार की स्थिति हाल के महीनों में कुछ महत्वपूर्ण बदलावों के बाद बनी है। जुलाई 2026 में धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था।
मंत्रिपरिषद में संभावित फेरबदल की चर्चा ऐसे समय हो रही है जब सरकार अपने तीसरे कार्यकाल के मध्य चरण की ओर बढ़ रही है। रिपोर्टों में संसद के आगामी शीतकालीन सत्र से पहले विस्तार या फेरबदल की संभावना जताई गई है, हालांकि सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक कैबिनेट विस्तार कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है।
संभावित फेरबदल में खाली पदों को भरने के साथ-साथ उन मंत्रियों के मंत्रालयों का पुनर्वितरण भी किया जा सकता है, जिनके पास फिलहाल अतिरिक्त जिम्मेदारियां हैं। इससे कई मंत्रालयों में कार्यभार के संतुलन पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, किन नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी या किन मंत्रालयों में बदलाव होगा, इस बारे में फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।
प्रधानमंत्री कार्यालय की 25 जुलाई 2026 की आधिकारिक सूची के अनुसार केंद्रीय मंत्रियों के बीच कई महत्वपूर्ण मंत्रालय पहले से ही अतिरिक्त प्रभार के साथ संचालित हो रहे हैं। उदाहरण के लिए अमित शाह के पास गृह और सहकारिता मंत्रालय हैं, जबकि जेपी नड्डा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय संभाल रहे हैं।



