धर्म-आस्था
अनंत चतुर्दशी व्रत कथा 2026: कौंडिन्य मुनि और शीला की पूरी पौराणिक कथा
अनंत चतुर्दशी की पौराणिक कथा में कौंडिन्य मुनि और उनकी पत्नी शीला का विशेष उल्लेख मिलता है। कथा के अनुसार शीला ने अनंत भगवान का व्रत और पूजन किया, जिसके बाद उनके जीवन में सुख-समृद्धि आने की मान्यता है।
कथा के अनुसार कौंडिन्य मुनि ने अनंत भगवान के व्रत और अनंत सूत्र के महत्व को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने अनंत सूत्र को उतारकर अग्नि में डाल दिया। इसके बाद उनके जीवन में विपरीत परिस्थितियां आने लगीं और उनकी संपत्ति नष्ट हो गई, ऐसी धार्मिक कथा प्रचलित है।
इसके बाद कौंडिन्य मुनि अनंत भगवान की खोज में वन की ओर चले गए। रास्ते में उन्हें कई प्रतीकात्मक स्वरूप दिखाई दिए और अंत में एक वृद्ध ब्राह्मण के रूप में भगवान अनंत के दर्शन हुए। भगवान ने उन्हें व्रत के महत्व का बोध कराया और दोबारा अनंत व्रत करने की बात कही।
अनंत चतुर्दशी की पूजा में 14 गांठ वाला अनंत सूत्र तैयार करने की परंपरा है। पूजा के बाद इसे धारण किया जाता है और धार्मिक मान्यता के अनुसार यह भगवान अनंत की कृपा, रक्षा और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार अनंत चतुर्दशी की कथा का श्रवण या पाठ करने से व्रत का धार्मिक महत्व पूरा होता है। अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में कथा तथा पूजा-विधि में कुछ अंतर मिल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग या आचार्य की परंपरा के अनुसार पूजा करना उचित माना जाता है।