जितिया आरती, जीवित्पुत्रिका व्रत में करें भगवान सूर्यदेव और जितिया माता की आरती

जितिया व्रत हिंदू धार्मिक परंपरा में महत्वपूर्ण व्रतों में माना जाता है। मान्यता के अनुसार माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से यह व्रत करती हैं। पूजा के दौरान विधि-विधान से आराधना करने के बाद आरती की जाती है।
धार्मिक मान्यताओं में भगवान सूर्यदेव को ऊर्जा और जीवन का आधार माना गया है। इसलिए कई पूजा परंपराओं में सूर्यदेव की उपासना और आरती का विशेष स्थान बताया गया है। जितिया व्रत के अवसर पर भी सूर्यदेव को अर्घ्य देने और आरती करने की परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है।
जितिया माता की आरती भी व्रत-पूजन का हिस्सा मानी जाती है। श्रद्धालु पूजा के दौरान आरती, भजन और प्रार्थना के माध्यम से अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की विधि और आरती की परंपरा में कुछ अंतर हो सकता है।
ध्यान रहे कि व्रत, पूजा और आरती से जुड़ी बातें धार्मिक एवं पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इनके आध्यात्मिक महत्व को आस्था के संदर्भ में समझा जाना चाहिए, न कि वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में।



