पन्ना के प्राणनाथ मंदिर में 9 दिन क्यों मनता है शरद पूर्णिमा महोत्सव?

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में स्थित श्री प्राणनाथ जी मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं, ऐतिहासिक महत्व और अनूठी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां हर साल शरद पूर्णिमा के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय महोत्सव मनाया जाता है। इसकी खास बात यह है कि उत्सव केवल पूर्णिमा की रात तक सीमित नहीं रहता, बल्कि नौ दिनों तक विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
नौ दिनों तक क्यों मनाया जाता है महोत्सव?
जिला प्रशासन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस महोत्सव की शुरुआत विजयादशमी के दिन खेजड़ा मंदिर में वीरा और तलवार उठाने की परंपरा से होती है। धार्मिक मान्यता है कि संवत 1740 में महामति प्राणनाथ जी ने बुंदेलखंड की रक्षा के लिए महाराजा छत्रसाल को तलवार सौंपकर आशीर्वाद दिया था। इस घटना को महोत्सव की परंपरा से जोड़ा जाता है।
क्या है पांच दिन तक चले महारास की कथा?
स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार, महामति प्राणनाथ जी शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में अपने लगभग पांच हजार सुंदरसाथ के साथ बंगला जी मंदिर में ठहरे थे। उस दौरान भगवान श्रीकृष्ण के महारास की चर्चा हुई। सुंदरसाथ ने उनसे अखंड महारास का अनुभव कराने का अनुरोध किया। इसके बाद महामति प्राणनाथ जी ने उनके साथ महारास किया, जो मान्यता के अनुसार पांच दिनों तक चला। इसी घटना की स्मृति में हर साल शरद पूर्णिमा महोत्सव आयोजित किया जाता है।
आधी रात को निकलती है श्रीजी की सवारी
शरद पूर्णिमा की रात इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण होती है। परंपरा के अनुसार, रात करीब 12 बजे बंगला जी मंदिर से श्रीजी की सवारी ब्रह्म चबूतरे स्थित रासमंडल तक लाई जाती है। इस दौरान श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हैं और धार्मिक उत्साह के साथ महारास उत्सव में शामिल होते हैं।
प्राणनाथ मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
पन्ना का श्री प्राणनाथ जी मंदिर प्रणामी संप्रदाय का प्रमुख तीर्थस्थल है। मध्य प्रदेश सरकार के जिला पोर्टल के मुताबिक, मंदिर का निर्माण वर्ष 1692 में हुआ था। इसकी स्थापत्य शैली में हिंदू और मुस्लिम वास्तुकला के तत्व दिखाई देते हैं। मंदिर परिसर में श्री गुम्मटजी, श्री बंगला जी और श्री खेजड़ा मंदिर सहित छह प्रमुख हिस्से हैं।
देश-विदेश से पहुंचते हैं श्रद्धालु
अंतरराष्ट्रीय शरद पूर्णिमा महोत्सव में भारत के विभिन्न हिस्सों के अलावा विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। आयोजन में पूजा-अर्चना, शोभायात्रा, संगीत, लोकनृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से क्षेत्र की धार्मिक विरासत को प्रस्तुत किया जाता है। यह महोत्सव पन्ना की पहचान को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर भी विशेष स्थान दिलाता है।
इस तरह पन्ना के श्री प्राणनाथ जी मंदिर में नौ दिनों तक चलने वाला शरद पूर्णिमा महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि इतिहास, लोकपरंपरा और सामूहिक आस्था से जुड़ा उत्सव है। महारास की कथा और महाराजा छत्रसाल से जुड़ी मान्यताएं इसे विशिष्ट पहचान देती हैं।



