वामन जयंती 2026 कब है? जानें तारीख, पूजा विधि और कथा

वामन जयंती भगवान विष्णु के पांचवें अवतार माने जाने वाले वामन देव के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान वामन का जन्म माता अदिति और ऋषि कश्यप के पुत्र के रूप में हुआ था। इस दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा और व्रत करने की परंपरा है।
वामन जयंती 2026 की तिथि 23 सितंबर है। इस दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूजा स्थल को शुद्ध करके चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाया जाता है और भगवान वामन की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। इसके बाद भगवान का पंचोपचार या षोडशोपचार विधि से पूजन किया जाता है।
पूजा में भगवान वामन को पीले वस्त्र, चंदन, अक्षत, पीले फूल और तुलसी अर्पित करने की परंपरा बताई गई है। धूप-दीप जलाकर भगवान को भोग लगाया जाता है और इसके बाद वामन अवतार की कथा का पाठ किया जाता है। कुछ परंपराओं में दही, चावल और दक्षिणा दान करने का भी विधान बताया गया है।
श्रीहरि के वामन अवतार की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, असुरराज महाबली ने अपनी शक्ति और तपस्या के बल पर तीनों लोकों पर अधिकार स्थापित कर लिया था। देवताओं को उनका अधिकार वापस दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया। वामन देव एक छोटे ब्राह्मण के रूप में राजा बलि के यज्ञ स्थल पर पहुंचे और उनसे तीन पग भूमि का दान मांगा।
राजा बलि ने वामन देव को तीन पग भूमि देने का वचन दे दिया। इसके बाद भगवान वामन ने विराट रूप धारण किया। पहले पग में उन्होंने पृथ्वी और दूसरे पग में देवलोक को नाप लिया। जब तीसरे पग के लिए कोई स्थान नहीं बचा, तो राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया। भगवान ने तीसरा पग उनके सिर पर रखा और उन्हें पाताल लोक भेज दिया। कथा में बलि की वचनबद्धता को विशेष महत्व दिया गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वामन जयंती पर भगवान विष्णु के इस स्वरूप की पूजा करने और व्रत रखने से भक्तों को श्रीहरि की कृपा प्राप्त होती है। हालांकि, पूजा-व्रत से जुड़े फल और धार्मिक प्रभाव आस्था एवं परंपरागत मान्यताओं पर आधारित हैं।



